फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राहत का इंतजार करते पथरा गईं बाढ़ पीड़ितों की आंखें

विज्ञापन
विज्ञापन
मऊ। ब्लॉक के तमसा नदी के किनारे बसे गांवों के बाढ़ पीड़ितों की आंखें राहत सामग्री का इंतजार करते करते पथरा गई हैं। बाढ़ के पानी ने गांवों के किसानों का सब कुछ बर्बाद कर दिया। उत्तर प्रदेश सरकार बार-बार इस बात की घोषणा कर रही है कि बाढ़ से हुए नुकसान की पर्याप्त भरपाई की जाएगी। लेकिन यथार्थ के धरातल पर स्थितियां कुछ और ही बयां कर रही हैं। इन दिनों बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसान मुआवजे के लिए दुकान से फार्म खरीद रहे हैं। अपने सारे कागजों की फोटो कापी करा रहे हैं। एक किसान लगभग 50 रुपये खर्च कर अपना कागज तैयार कर रहा है परंतु किसानों के सामने दुविधा है कि जिनके खेत एक से अधिक दो या तीन ग्राम पंचायतों में हैं और सभी ग्राम पंचायतों के अलग-अलग लेखपाल हैं, वे किसान कितने प्रति में अपने फार्म भरें। कई परिवारों में पांच भाई हैं खेत सबके नाम है तो कितने फार्म भरें कुछ किसानों तो ऐसे हैं जिनकी खेती गांव में है लेकिन परिवार शहरों में रहते हैं। ऐसे किसानों का आधार कार्ड शहर का है, उनकी खेती नुकसान हुई है, ऐसे किसान अपने फार्म कैसे भरें। किसानों का कहना है कि जब सबके खेतों के कागजात लेखपाल के पास ही है इसमें फार्म भरना और किसानों से अनावश्यक खर्च कराना कहां तक न्याय संगत है। किसानों का कहना है कि लेखपालों से सर्वे कराकर किसानों की सूची बनाकर उन्हें मुआवजे का भुगतान करने की प्रक्रिया की व्यवस्था करनी चाहिए। इस बाबत किसान नेता देवेंद्र प्रसाद मिश्रा, जितेंद्र राजभर, पूर्व जिला पंचायत सदस्य संजय यादव, अविनाश कुमार ने प्रशासन से मांग किया है कि किसानों से फार्म भरवाने की बजाए लेखपाल से सूची तैयार कराकर मुआवजे का भुगतान किया जाए। इस संबंध में तहसीलदार संजीव कुमार यादव का कहना है कि किसानों को खतौनी की नकल देनी होगी। सर्वे भी कराया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें