मऊ। करोड़ों की लागत से बना पूर्वांचल एक्सप्रेस वे जिले की सीमा से 26 किमी तक गुजरा है। लेकिन जिले में लिंक न होने से जनपदवासियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। अमर उजाला में खबर प्रकाशित करने पर लोग इस मुहिम से जुड़ने लगे हैं। आम लोगों के साथ ही काफी संख्या में साड़ी कारोबारी लखनऊ सहित महानगरों को जाते हैं, लेकिन सुविधा न मिलने से आंदोलित हैं। कारोबारियों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर एक्सप्रेस-वे से लिंक जोड़ने की गुहार लगाई है।
जिले का मुख्य साड़ी कारोबार है। यहां के बुनकरों द्वारा बुनी गई साड़ियां देश विदेश में अपनी पहचान बनाई है। सरकार की तरफ से साड़ी कारोबार को गति देने के लिए एक जिला एक उत्पाद में शामिल किया गया है। आम लोगों के साथ ही कारोबारियों को कम समय में लखनऊ, दिल्ली सहित महानगरों को जाने के लिए करोड़ों की लागत से पूर्वांचल एक्सप्रेस वे जिले के सदर और मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के नियामतपुर, शाहजादपुर, अहिलाद, ओन्हाइच, मजखनी, खरगजेपुर, ताजपुर गांव, गोकुलपुरा, खरेवा, अमेठी, समसाबाद, करहां, कोतवालीपुर, बरडीहा, सुदामपुर, भुजैनी, शंभूपुर, भांटीकला, लखनपुरा, कड़याखास, जमुई, टड़वाचौबेपुर, सैदपुर, चाल्हा, सादीपुर, पोछा, मुबारकपुर पट्टी, दतौली, जहनियापुर, भांटी खुर्द, कोठिया, हुसेनपट्टी, भुसुवा, याकूबपुर, सुरहुरपुर सहित 40 गांवों से होकर गुजरा है। इसके लिए लगभग तीन हजार किसानों की 325.75 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई है। पूर्वांचल एक्सप्रेस बनने के समय जिले के लोगों ने जश्न मनाया था कि क्षेत्र के लोगों को लखनऊ, दिल्ली कम समय में पहुंच जाएंगे लेकिन अब लोगों के सपने पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है। कारोबारियों की मानें तो पूर्वांचल एक्सप्रेस वे जिले के 40 गांवों से 26 किमी से होकर गुजरा है, लेकिन इस एक्सप्रेस वे से चढ़ने या उतरने के लिए लिंक मार्ग नहीं दिया गया है।
जिले से गुजरे हिस्से को यूपीडा ने पैकेज नंबर सात-सात का नाम दिया है। इसका मतलब आजमगढ़ के सठियांव और गाजीपुर के हैदरा में चढ़ने उतरने की व्यवस्था है। ऐसे में एक गेट से चढ़ने और दूसरे गेट को पैकेज से डिवाइड किया गया है। इस तरह से मऊ जिले का हिस्सा भले ही पैकेज सात में है, लेकिन यहां इसकी सुविधा नहीं है।