मऊ। शिक्षा सत्र का पांच माह बीतने के बाद भी परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को नि:शुल्क पुस्तकें नहीं मिल पाई है। प्रकाशकों के लिए जिले में किताबों की आपूर्ति की तय समय सीमा पांच सितंबर समाप्त हो गई। उन्होनें अभी तक47.48 प्रतिशत पुस्तकों की आपूर्ति की है। विभाग इस देरी पर प्रकाशकों पर जुर्माना लगाएगा। आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो जिले में 1409294 किताबों के मुकाबले महज 669208 किताबों का वितरण हो सका है। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को निशुल्क पुस्तकें वितरित करने में बेसिक शिक्षा विभाग अपने ही तय लक्ष्य में फेल हो गया है। प्रकाशकों के लिए जिलों में किताबों की आपूर्ति की तय समय सीमा पांच सितंबर को समाप्त हो गई। विभाग अब प्रकाशकों पर देर से होने वाली आपूर्ति पर अर्थदंड लगाएगा। हर हफ्ते देर से मिलने वाली किताबों के भुगतान में से एक फीसदी राशि की कटौती की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार पुस्तकों की खरीद के लिए आर्डर की प्रक्रिया जून के प्रथम सप्ताह में शुरू हुई थी। कुल 16 प्रकाशकों को तीन महीने में आपूर्ति के निर्देश दिए गए थे। प्रकाशकों को पांच सितंबर तक शत प्रतिशत आपूर्ति करनी थी। लेकिन वह इसमें खरे नहीं उतरे। विभाग की तरफ से लापरवाही बरतने वाले प्रकाशकों को नोटिस जारी किया गया है। एडी बेसिक, आजमगढ़ मंडल मनोज कुमार मिश्र ने बताया कि प्रकाशक तय तारीख तक किताबें नहीं दे पाए। अब देर से होने वाली आपूर्ति पर अर्थदंड लगाया जाएगा। लापरवाही बरतने वाले सात प्रकाशकों को नोटिस जारी किया गया है।