राज्य सूचना आयुक्त ने सोमवार को विकास भावन सभागार में जनसूचना के लंबित मामलों की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान छह मामले तीन साल पुराने पाए गए, जबकि 27 मामले दो से एक साल की अवधि के लंबित पाए गए।
सूचना आयुक्त ने कहा कि सूचना देने में विलंब होने पर अब विभाग पर नहीं बल्कि संबंधित जनसूचना अधिकारी को जुर्माना अदा करना होगा।
सूचना आयुक्त पारसनाथ गुप्ता ने जनपद स्तरीय अधिकारियों के साथ जनपद स्तर से मांगी गई सूचनाओं की समीक्षा की। उन्होंने सभी जन सूचनाधिकारियों को निर्देश दिया कि जनसूचना के तहत जो भी सूचनाएं मांगी जाएं, उन्हें हर हाल में एक माह में उपलब्ध करा दी जाएं।
यदि इसमें देर होती है तो सारा दायित्व जनसूचना अधिकारियों का होगा। हिदायत दी की आवेदन मिलने के बाद सभी जनसूचना अधिकारी यह सुनिश्चित कर लें कि आवेदन का अनुपालन या उसमें परीक्षण लगाई गई है या नही।
साथ ही संबधित जानकारी उनके कार्य क्षेत्र की है या नहीं। उन्हाेंने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों की जानकारी देना बाध्यकारी है।
यदि मांगी गई सूचना पहले से ही नेट पर डाल दी गई है तो वैसी सूचनाएं देना जरूरी नहीं है। प्रथम अपीलीय अधिकारी का नाम और मोबाइल नंबर अवश्य लिखा जाए।
जिससे सूचना देने में देरी होने के मामले में संबधित अधिकारी से ही जुर्माना वसूल किया जा सके। ऐसे में मामलों में विभाग से जुर्माना नही वसूला जाएगा।
बैठक में जिलाधिकारी चन्द्रकांत पांडेय ने कहा कि सभी अफसरों को जनसूचनाएं निर्धारित अवधि के अंदर देने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में सीडीओ यू एन सिंह, एडीएम समीर वर्मा, पीडी डा. हरचरन सिंह डीडी एजी आशुतोष मिश्रा आदि उपस्थित थे।