शासन की धान खरीद योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा। जिले के धान क्रय केंद्रों पर किसानों से खरीदे गए धान का उठान न होने से खरीद बंद चल रही। इसके चलते आढ़तियों की चांदी कट रही है। अभी तक लक्ष्य का 30 प्रतिशत ही खरीद हो सकी है।
मिलरों द्वारा क्रय केंद्रों से खरीदे गए धान में कटौती किए जाने से क्रय केंद्र प्रभारी धान खरीद करने से कतरा रहे हैं। उधर, बैकों में अवकाश के चलते किसानों का 283 लाख का बकाया चल रहा है। शिकायत के बाद भी खरीद प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई जा सकी है।
किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए धान खरीद योजना शुरू की गई। इसके तहत जिले में 59 धान क्रय केंद्र खोले गए हैं। शासन की तरफ से 71 हजार एमटी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। धान खरीद शुरू होने के 54 दिन बीतने के बाद 4230 किसानों से मात्र 22082 एमटी की खरीद हो सकी है।
बैंक में अवकाश रहने के चलते किसानों का 283 लाख बकाया चल रहा है। कई धान क्रय केंद्रों पर किसानों से खरीदे गए धान का उठान नहीं हो सका है। इसके चलते खरीद बंद चल रही है। नए शासनादेश के तहत मिलरों को ही क्रय केंद्रों पर खरीदे गए धान का उठान करना है। जिले में छह मिलरों का ही एग्रीमेंट हो सका है। मिलर अपने हिसाब से धान का उठान कर रहे हैं, इसके चलते धान क्रय केंद्रों पर धान डंप पड़ा है।
विभागीय उदासीनता के चलते आढ़तियों की चांदी कट रही है। रबी सीजन में पैसे की सख्त जरूरत है। ऐसे में अपनी फसल कम कीमत पर ही बेचने को विवश हैं।
किसान नेता देवप्रकाश राय, देवेंद्र सिंह, पिपरीडीह क्षेत्र के किसान सुरेंद्र कुमार सिंह, जर्नादन शर्मा, रतनपुरा क्षेत्र के वृजभान प्रसाद का कहना है कि विभागीय लापरवाही के चलते धान क्रय केंद्रों पर उठान नहीं हो पा रहा है। जरूरत के समय धान खरीद न होने से किसानों को कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ रही है।
समस्या का अविलंब समाधान नहीं किया गया तो किसान चुप नहीं बैठेगा। जिला खाद्य विपणन अधिकारी दिनेश तिवारी का कहना है कि मिलरों द्वारा उठान किया जा रहा है। बैंकों में अवकाश के चलते किसानों का बकाया चल रहा है।