जिले की 29 ग्रामीण मार्गों पर निजी बसों के संचालन के लिए प्राप्त आवेदनों को स्वीकृति मिल गई है। बस मालिकों को सहूलियत देते हुए परिवहन निगम ने परमिट को अनिवार्य नहीं किया है।
28 अप्रैल के बाद हर हाल में बसों का संचालन शुरू कराया जाना है, लेकिन डिपो के अधिकारियों को बिना परमिट डग्गामारी होने का डर सता रहा है।
रोडवेज बस के चालक-परिचालकों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि ग्रामीण सड़कों पर तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन जिला मार्गों और हाईवे पर पहुंचते ही ये बसें उनके साथ-साथ चलेंगी और सवारियां बैठाएंगी। इससे उनकी बसों को घाटा हो सकता है। रोडवेज की कुछ बसें तो तेल खपत जितनी कमाई भी नहीं कर पा रही हैं।
उधर परिवहन निगम के अधिकारियों ने एआरटीओ के साथ मिलकर सर्वे किया और सभी रूटों का चार्ट तैयार कर लिया है। निगम का दावा है कि इस चार्ट को चालक अपने साथ रखेगा और चेकिंग के दौरान यही चार्ट उसके लिए परमिट का काम करेगा।
एआरएम गौतम कुमार गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 18 लोगों ने 29 ग्रामीण सड़कों पर बसें चलाने के लिए आवेदन किया था, जिसे मंजूरी मिल गई है। सरकार द्वारा जारी नियमों के अनुसार इसके लिए बसों के परमिट की आवश्यकता नहीं है।