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प्रमुख सचिव जी: किसानों को छुट्टा पशुओं की समस्या से कब मिलेगी राहत:

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मऊ। सर्दी के मौसम में छुट्टा पशुओं के उत्पात से किसानों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। छुट्टा पशुओं की समस्या के चलते शासन की तरफ से प्रत्येक गांवों में अस्थायी पशु आश्रय स्थल बनाए जाने का फरमान जारी किया गया था, लेकिन अभी तक 25 गांवों में ही अस्थायी पशु आश्रय स्थल बने हैं। हालत यह है कि विभागीय लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। रात के समय छुट्टा पशुओं का झुंड खेतों में घुसकर तहस नहस कर दे रहे हैं। मेहनत कमाई की फसल की लागत डूबने की चिंता किसानों को खाए जा रही है। मजबूरी में कड़ाके की सद की रात में किसान अपने खेत की रखवाली को जाग रहे हैं।
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छुट्टा पशुओं के सड़क पर घूमते रहने से सड़क दुर्घटना का ग्राफ बढ़ने लगा है। इसके बाद भी छुट्टा पशुओं को पशु आश्रय स्थल भेजने की जहमत तक नहीं उठाई जा सकी है।जिले में 671 ग्राम पंचायतें हैं। अगेती गेहूं की सिंचाई हो चुकी है। अधिकांश गांवों में छुट्टा पशुओं का उत्पात बढ़ गया है। छुट्टा पशुओं के आतंक से गेहूं, सरसों, चना, मटर की फसल सहित अन्य फसलों के खेत में छुट्टा पशुओं का झुंड घुसकर तहस नहस कर दे रहे हैं। परेशान किसानों ने विभागीय अधिकारियों के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाकर थक चुके हैं, लेकिन अधिकारी आश्वासन लेकर मामले को टाल दे रहे हैं।
शासन की तरफ से छुट्टा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने के लिए सभी गांवों में अस्थायी पशु आश्रय स्थल बनाने का निर्देश दिया गया था। लेकिन अभी तक 25 गांवों में ही अस्थायी पशु आश्रय बनाया जा सका है। छुट्टा पशुओं को ब्लाक स्तर पर खंड विकास अधिकारी, सेक्रेटरी तथा प्रशासक को अभियान चलाकर छुट्टा पशुओं को अस्थायी पशु आश्रय स्थल भेजवाने का प्राविधान है, लेकिन सब कुछ कागज पर चल रहा है। इस बाबत मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.आरएन सिंह का कहना है कि छुट्टा पशुओं को पशु आश्रय स्थल भेजवाने की जिम्मेदारी संबंधित बीडीओ, सेक्रेटरी तथा प्रशासक की है।
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छुट्टा पशुओं के आतंक से खेती किसानी पर संकट:
बढुआगोदाम / पिपरीडीह। क्षेत्र के ताजोपुर, बढुआगोदाम, इमिलियाडीह, कहिनौर, पिपरीडीह, उस्मानपुर, रैकवारडीह, महलीपुर सहित तमाम गांवों में छुट्टा पशुओं का आतंक बढ़ गया है। इस संबंध में किसान सुरेद्र नाथ पांडेय, प्रमोद कुमार, लल्लन सिंह, रामपुकारे सिंह, श्रीकांत यादव का का कहना है कि गेहूं के फसल की सिंचाई कर खाद का छिड़काव भी कर दिया गया है लेकिन रात में छुट्टा पशुओं का झुंड फसल को नष्ट कर दे रहे हैं। सर्दी के मौसम में रखवाली नहीं कर पा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों को शिकायती पत्र दिया गया लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हो सका है। पशुओं के आतंक का यही हाल रहा तो इस वर्ष मेहनत कमाई की फसल घर पहुंचना मुश्किल है।
77 के सापेेक्ष दो गांवों में बना है पशु आश्रय स्थल
रतनपुरा। क्षेत्र के विभिन्न गांवों में छुट्टा पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ने से किसानों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। प्रत्येक गांव में झुंड के झुंड पशु घूम रहे हैं लेकिन विभाग की तरफ से छुट्टा पशुओं को पशु आश्रय स्थल नहीं पहुंचाया जा सका है। रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र में 77 ग्राम पंचायतों हैं। लेकिन दो गांव में ही पशु आश्रय स्थल बन सका है। कुड़वा में बना पशु आश्रय स्थल शोपीस बनकर रह गया है। सर्दी के मौसम मेें किसान रात के समय अपनी जान को जोखिम में डालकर खेत की रखवाली करनी पड़ रही है। इस संबंध में किसान रामनाथ यादव, महेंद्र यादव, शिवकुमार सिंह, जर्नादन पांडेय का कहना है कि खंड विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया जा सका है।
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