मऊ। सरकार की तरफ से जनता को सस्ती दवा दिलाने के लिए सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की स्थापना की गई। लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते जिले में लोगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। निजी तो निजी सरकारी अस्पताल के डाक्टर भी कमीशन के चक्कर में मरीजों को महंगी दवाएं लिखते हैं। वहीं जन औषधि केंद्र पर हर मर्ज की दवा भी उपलब्ध नहीं है, जिससे गरीब मरीजों को बाहर से मंहगी दवा खरीदनी पड़ती है।
सोमवार को जिला अस्पताल के ओपीडी में पहुंचकर पड़ताल की गई, इस दौरान किसी भी चिकित्सक के पास जेनरिक दवाओं की सूची तक उपलब्ध नहीं मिली। जानकारी करने पर यह बात सामने आई कि जिले में कुल 13 जन औषधि केंद्र खोले गए हैैं। लेकिन इन दवाओं की दुकानों का कही प्रचार प्रसार नहीं किया गया है। जिला अस्पताल स्थित जन औषधि केंद्र पर पहुंचकर दवा के बारे में जानकारी की गई तो पता चला कि वहां महज 45 प्रकार की दवाएं मौजूद है। इसमें साधारण रोगों के साथ साथ कुछ एंटीबायोटिक शामिल थे। जबकि बाहर हाईवे पर मौजूद जन औषधि केंद्र के पास दो सौ प्रकार क दवाएं उपलब्ध थीं।
नाम न छापने की शर्त पर एक दवा के विक्रेता ने बताया कि आर्डर देने के बाद भी दवा उपलब्ध नहीं होती। ऐसे में वो क्या करें, मरीज आते भी हैं दवा नहीं उपलब्ध होती। इन बातों को जानकार भी अधिकारी मौन साधे हैं। दुकानदार ने बताया कि वह सीएमएस के साथ अन्य ओपीडी के डाक्टरों को दुकान पर उपलब्ध दवाओं की सूची कई बाद दिया है। लेकिन दवा नहीं लिखी जाती।
बताते चले मऊ में कुल 13 जन औषधि केंद्र मौजूद हैं। इसमें एक सदर अस्पताल के परिसर में दूसरा अस्पताल परिसर के बाहर मौजूद है। इसके अलावा एक भीटी में है। इसके बाद सभी शहर से बाहर मौजूद है। प्राइवेट को छोड़ दिया जाए तो सरकारी अस्पताल के चिकित्सक भी इस औषधि केंद्र की दवा नहीं लिखते। दवा के पर्चियों पर ब्रांडेड दवाएं ही लिखी मिल रही हैं।
कमीशन और जागरूकता का अभाव बन रहा बाधक
मऊ। विभाग की तरफ से भी व्यापक प्रचार प्रसार न होने से जेनरिक दवाओं के बारे में लोगों को जानकारी नहीं हो पा रही है। जिला अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सकों के पास जेनरिक दवाओं की सूची तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। जिससे मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं, ब्रांडेड दवा के थोक और अधिकतम खुदरा मूल्य में भारी अंतर होता है। कमीशन के चक्कर में चिकित्सक ब्रांडेड दवाओं को लिखने का मोह नहीं छोड़ पा रहे।
दवाएं लेने वालों में बाहर के मरीजों की संख्या अधिक
मऊ। जला अस्पताल में इलाज कराने आने वाले गरीब मरीजों को सस्ती दरों पर दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अस्पताल परिसर मेंही प्रधानमंत्री औषधि केंद्र तो बनाया गया है। लेकिन यहां बमुश्किल 40 से 45 प्रकार की दवाएं मिलती है। दुकान के एक कर्मचारी ने बताया कि प्रतिदिन दुकान से 50 से ज्यादा मरीज दवाएं लेते हैं, इसमें अधिकांश मरीज बाहरी होते हैं। अस्पताल सूत्रों की माने तो अधिकांश चिकित्सक बाहर की दवाओं को लिखते है। मरीजों के कई बार कहने पर ही डाक्टर्स प्रधानमंत्री औषधि केंद्र पर मिलने वाली दवाएं लिखते है।
इस मामले में सीएमओ डॉ. सतीश चंद्र सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी के चिकित्सकों के यहां जेनरिक दवाओं की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। औचक निरीक्षण में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।