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Mau News: प्रधान ने दो सगे भाइयों, चाचा और गांव के बाहर रहने वाले का भी मनरेगा में कराया भुगतान

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मऊ। जिले के अधिकांश ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। हाल में ही एक फर्जीवाड़ा का बड़ा मामला रतनपुरा ब्लॉक का अईलख गांव में उजागर हुआ है। यहां एक होमगार्ड को ही मजदूर दिखाकर उसके खाते में ही मजदूरी का भुगतान भी करा दिया गया है। इतना ही नहीं ग्राम प्रधान ने सचिव से मिलकर मनरेगा में अपने दोनों सगे भाइयों, चाचा और जो बाहर रह रहा है उसे भी मजदूर दिखाया गया है। उधर होमगार्ड प्रकरण में बीडीओ द्वारा जांच में यह मामला सही होने पर इसकी रिपोर्ट आला अधिकारियों को भेज दी गई है। वहीं इस मामले में जिलाधिकारी का कहना है कि जांच रिपोर्ट को देखने के बाद इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।
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जिसने कभी मजदूरी की ही नहीं उसे बना दिया मनरेगा मजदूर
प्रधान ने सचिव से मिली भगत कर अपने गांव में फर्जी मजदूर बनाकर हजारों का भुगतान किया। पड़ताल में सामने आया कि गांव निवासी सुनील पुत्र शंभूनाथ वर्मा और कन्हैया कुशवाहा पुत्र हरि नाथ को मजदूर दिखाया गया है। इस मामले में सुनील से बात की तो उसने गांव में किसी भी तरह की मजदूरी से साफ इन्कार कर दिया है।वर्तमान में उसके द्वारा हैदराबाद होने की बात कही गई। इतना ही नहीं प्रधान ने मिली भगत करके अपने दोनों सगे भाई लाल बहादुर और संजय को भी मनरेगा में मजदूर बना दिया। प्रधान द्वारा अपने चाचा शिव बच्चन को भी मनरेगा मजदूर बनाकर इसका भुगतान कराया गया है।
होमगार्ड के भुगतान का मामला जांच में सही मिला
दरअसल इसी गांव निवासी हरिशंकर सिंह ने गत दिनों मजदूरी भुगतान में अनियमितता की शिकायत को लेकर जिला प्रशासन से इसकी शिकायत की गई थी। जिसके बाद गांव निवासी गीतेश मौर्य हाेमगार्ड होने के बाद भी मनरेगा में नाम शामिल किया गया था। वहीं इसी दौरान ग्राम प्रधान व सचिव ने होमगार्ड के नाम पर दो अलग-अलग बाउचर से मजदूरी का भुगतान किया गया। पहला बाउचर 20 दिसबंर से 13 जनवरी तक मजदूरी दिखाकर 07 फरवरी को 25 दिन का 5925 रुपया भुगतान करा लिया। इसी तरह 14 जनवरी से 08 फरवरी तक 25 दिन की मजदूरी दिखाकर 10 फरवरी 10 को 5925 रुपये का भुगतान करा लिया। इस प्रकार 50 दिनों का बाउचर निकाला गया। इसके आधार पर ग्राम प्रधान व सचिव ने लखनऊ में प्रशिक्षण ले रहे होमगार्ड को 11,850 रुपये मजदूरी का भुगतान किया था। इस मामले की शिकायत के बाद बीडीओ रतनपुरा विवेक सिंह ने इस मामले की जांच की, बताया कि जांच रिपोर्ट में शिकायत सही मिली है।इसको लेकर रिपोर्ट बनाकर आला अधिकारियों को भेज दी गई है। इस मामले में जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है, इसकी जांच चल रही थी।इस मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर ठोस कार्रवाई की जाएगी।
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पहले भी फर्जीवाड़े का हो चुका है खुलासा
मनरेगा में खेल कई ग्राम पंचायतों में होता है लेकिन इसकी जांच किसी किसी गांव में होती है। इससे पहले कोपागंज विकास खंड के ग्राम सभा भांवरकोल में यह मामला उजागर हुआ था। गांव निवासी अंजू गोड़ पत्नी भामा गोंड ने मार्च 2024 में जिलाधिकारी को पत्र लिखकर प्रधान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्यवाही की मांग की थी। उसने पत्र में प्रधान पर अपनी मां मीरा देवी जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत हैं और दो भाई पत्नी के नाम पर फर्जी जाबकार्ड बनवा कर मनरेगा मजदूरी का भुगतान करने और घर के सभी सदस्यों के नाम शौचालय का भुगतान लेने का आरोप लगाया था। जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता से लेते हुए 25 जुलाई 2024 जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन करते हुए जांच का आदेश दिया था। जांच टीम में आरोप सही पाया गया था।
होमगार्ड के भुगतान का मामला जांच में सही मिला

अईलख गांव निवासी हरिशंकर सिंह ने गत दिनों मजदूरी भुगतान में अनियमितता की शिकायत को लेकर जिला प्रशासन से इसकी शिकायत की गई थी। जिसके बाद गांव निवासी गीतेश मौर्य हाेमगार्ड होने के बाद भी मनरेगा में नाम शामिल किया गया था। वहीं इसी दौरान ग्राम प्रधान व सचिव ने होमगार्ड के नाम पर दो अलग-अलग बाउचर से मजदूरी का भुगतान किया गया। पहला बाउचर 20 दिसबंर से 13 जनवरी तक मजदूरी दिखाकर 07 फरवरी को 25 दिन का 5925 रुपया भुगतान करा लिया। इसी तरह 14 जनवरी से 08 फरवरी तक 25 दिन की मजदूरी दिखाकर 10 फरवरी 10 को 5925 रुपये का भुगतान करा लिया। इस प्रकार 50 दिनों का बाउचर निकाला गया। इसके आधार पर ग्राम प्रधान व सचिव ने लखनऊ में प्रशिक्षण ले रहे होमगार्ड को 11,850 रुपये मजदूरी का भुगतान किया था। इस मामले की शिकायत के बाद बीडीओ रतनपुरा विवेक सिंह ने इस मामले की जांच की, बताया कि जांच रिपोर्ट में शिकायत सही मिली है।इसको लेकर रिपोर्ट बनाकर आला अधिकारियों को भेज दी गई है। इस मामले में जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है, इसकी जांच चल रही थी।इस मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर ठोस कार्रवाई की जाएगी।
जॉब कार्ड मनरेगा के लिए बनता है, यह केंद्रीय वित्त और राज्य वित्त के तहत ग्राम पंचायत में काम होता है।पहले काम किया था डोंगल खराब था इस लिए उस समय मजदूरी नहीं जा सकी थी। - ब्रह्मप्रकाश पाठक, सचिव अईलख


मामला मनरेगा नहीं राज्य वित्त का है।होमगार्ड को मजदूरी देने की बात है तो यह मामला मार्च माह से पहले का है।नौकरी से पहले वह काम करता था। - विजय कुमार, ग्राम प्रधान अईलख
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