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बर्ड फ्लू की दहशत, जानकारी, जागरूकता से बचाव संभव

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मऊ। कोरोना संक्रमण से अभी लोगों के बीच भय कम नहीं हुआ। लेकिन इसबीच बर्ड फ्लू की दस्तक ने लोगों की समस्या बढ़ा दिया। हालांकि इससे बचाव तथा जागरूकता से इस बीमारी से बचा जा सकता है। उधर प्रशासन भी बर्ड फ्लू बीमारी से निपटने के लिए जिले में टास्क फोर्स को गठित कर पशु पालन विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों को अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश दे दिया है।
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बर्ड फ्लू बीमारी को लेकर लोगों के बीच एक भय का माहौल है। लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि अधिकांश लोगों को इस बीमारी के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। कोरोना संक्रमण महामारी की तरह जागरूकता तथा बचाव के साथ इस बीमारी से बचाव संभव है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सतीशचंद्र सिंह ने बताया कि इस बारे में आम लोगों को खास जानकारी नहीं है।
यही वजह है कि किसी भी पक्षी की मौत होने पर लोग बर्ड फ्लू की आशंका से भयभीत हो जा रहे हैं। बताया कि बर्ड फ्लू एक बेहद खतरनाक बीमारी है जो इंफ्लूएंजा टाइप-ए वायरस की वजह से फैलती है। इसे एवियन इंफ्लूएंजा भी कहा जाता है। बर्ड फ्लू पक्षियों से इंसानों या दूसरे जानवरों में भी फैल सकता है। बताया कि मुख्य तौर पर पोल्ट्री फार्म में पलने वाली मुर्गियों से यह फैलना शुरू होता है। डब्लूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक जीवित या मरे हुए संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने से ये बीमारी हो सकती है। लेकिन इंसान से इंसान में ये बहुत आसानी से नहीं फैलता है।
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बताया कि अभी तक इस बात के भी साक्ष्य नहीं हैं कि पके हुए पोल्ट्री फूड से किसी इंसान को बर्ड फ्लू हो सकता है। ये वायरस ताप के प्रति संवेदनशील है और कुकिंग टेंपरेचर में नष्ट हो जाता है। कहा कि पक्षियों के संक्रमित होने के बाद इंसान के बीच इसके फैलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। बर्ड फ्लू की बीमारी पक्षियों के मल, लार, नाक-मुंह या आंख से स्राव के माध्यम से इंसानों में फैल सकती है। कहा कि एक रिपोर्ट के मुताबिक, पक्षियों के पूरी तरह से पके हुए मांस या अंडे खाने से ये बीमारी लोगों के बीच नहीं फैलती है।
संक्रमित पक्षी लगभग 10 दिनों तक मल या लार के जरिए वायरस रिलीज करता है। आप किसी दूषित सरफेस के माध्यम से भी वायरस की चपेट में आ सकते हैं। इससे बचने के लिए पोल्ट्री फार्म में काम करने वाले लोगों से दूर रहना चाहिए। प्रभावित इलाकों में जाने से बचना चाहिए और संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने से बचें। बर्ड फ्लू के लक्षण आमतौर पर होने वाले फ्लू के लक्षणों से काफी मिलते-जुलते हैं। इंफेक्शन की चपेट में आने पर आपको खांसी, डायरिया, रेस्पिरेटरी में परेशानी, बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, बेचैनी, नाक बहना या गले में खराश की समस्या हो सकती है।
वहीं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरएन सिंह ने बताया कि इस बीमारी से निपटने के लिए चारों तहसील सदर, मधुबन, घोसी, मुहम्मदाबाद गोहना में टास्क फोर्स, रिस्पांस टीम गठित की जा चुकी है। साथ ही लोगों को बर्ड फ्लू के बारे में जानकारी देकर जागरूक किया जा रहा है ।
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