313 प्रत्याशियों पर तीन साल के लिए लगा प्रतिबंध
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विधानसभा चुनाव में अगर किसी प्रत्याशी ने शराब का प्रलोभन देकर वोटरों को अपनी तरफ करने की कोशिश की तो यह कदम उसके लिए भारी पड़ सकता है। शिकायत मिलने पर प्रत्याशी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। चुनाव में इन वस्तुओं का वितरण रोकने एवं अन्य खर्चों पर भी अंकुश लगाने के लिए निर्वाचन आयोग ने इस बार खर्च की सीमा 28 लाख रुपये निर्धारित किया है। इस रकम में से भी वह अवैधानिक वस्तुओं पर खर्च नहीं कर सकता। प्रत्याशी जो भी खर्च करेंगे उनका निर्धारित समय पर विवरण भी उपलब्ध कराना होगा।
मूल रूप से निर्वाचन व्यय को दो श्रेणियों में रखा गया है। इसमें जन सभाओं, पोस्टरों, बैनरों, वाहनों, प्रिंट या इलैक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापनों जैसे प्रचार संबंधी मदों पर व्यय शामिल होता है। दूसरी श्रेणी में वे व्यय दिखाने पर विधि के अधीन अनुमति प्राप्त नहीं होगी। अगर किसी ने मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से उनके बीच रुपये, शराब या अन्य किसी वस्तु का वितरण किया तो वह रिश्वत देने की परिभाषा के अंतर्गत आता है और यह भारतीय दंड संहिता के अधीन एक अपराध है। इस प्रकार की शिकायत मिलने पर संबंधित प्रत्याशी के विरुद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के अधीन एक भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आएगा। ऐसी मदों पर व्यय करना अवैध माना जाएगा। यही नहीं प्रतिनियुक्त विज्ञापन एवं पैसा देकर खरीदे गए समाचार भी पेड न्यूज की श्रेणी में आएंगे।