अपराध पीड़ित महिलाओं को अपनी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थानों में अब झिझकना नहीं होगा। उनकी सुनने के लिए थाना में महिला मुंशी होंगी।
आजमगढ़ परिक्षेत्र के डीआईजी प्रशांत कुमार ने पुलिस लाइन सभागार में मंगलवार को महिला उत्पीड़न से संबंधित विवेचना कार्यशाला में बताया कि उच्चतम न्यायालय ने हाल में महिलाओं को इंसाफ दिलाने को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। इसमें महिला उत्पीड़न से संबंधित विवेचनाओं एवं घटनाओं में कई कदम उठाए जाने की बात है।
कहा कि अब थानों पर उत्पीड़न से पीड़ित के पहुंचने पर उसकी तहरीर लेने के लिए महिला मुंशी तैनात रहेंगी। साथ ही पीड़ित का 161 का बयान भी वह ले सकती हैं। पीड़ित का चिकित्सकीय परीक्षण महिला आरक्षी की देखरेख में करने का निर्देश है। यही नहीं यदि कोई महिला विकलांग या अशक्त है तो महिला पुलिस उसके घर या उसके बताए स्थान पर जाकर बयान लेगी।
बताया कि महिला आरक्षी की देखरेख में 24 घंटे के भीतर पीड़िता का मेडिकल मुआयना किया जाएगा। किसी विशेष परिस्थितियों में ही विलंब होगा, अन्यथा चिकित्सक की लापरवाही पर उसके विरुद्ध भी कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जा सकता है। पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सिंह ने बताया कि मेडिकल मुआयना में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दें।
चिकित्सक की लापरवाही पाए जाने पर 50 हजार रुपये तक दंड का प्राविधान है। कहा कि महिला उत्पीड़न की घटनाओं के विवेचना सहित उनकी जांच पड़ताल के जो भी नियम कानून हैं सभी थानाध्यक्ष उसके बारीकियों की जांच पड़ताल कर लें। सभी थानों पर कैमरे एवं विडियो कैमरे अपडेट होने चाहिए।
बयानों को सीडी में साक्ष्य के तौर पर रखा जाए यह साक्ष्य न्यायालय में कारगर साबित होंगे। इस अवसर पर मुख्य रूप से एसपीओ, अपर पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सिंह, सीओ सिटी अशोक, सीओ मुहम्मदाबाद गोहना डा. अजय कुमार, सीओ मधुबन वंशीधर मिश्रा, सीओ घोसी डा. अजय कुमार के साथ सभी थानाध्यक्ष सभी थानों की महिला मुंशी आदि उपस्थित रहे।