सांसों में धुल रहा मेडिकल वेस्ट का जहर
अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की हालत काफी दयनीय है। अस्पतालों के आस पास ही इन्हें जलाया जाता है। इससे भयंकर दुर्गंध और धुआं आस पास के इलाके में फैलता है। सरकार के दिशानिर्देशों की अनदेखी करके यह सिलसिला चला आ रहा है। सरकारी अस्पतालों से मेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए नियुक्त वाहन महीने में एक बार आकर खानापूरी कर जाता है।जिला अस्पताल से निकलने वाला कूड़ा इनडोर के बगल में सड़क के किनारे फेंका जाता है। जब कूड़े का ढेर काफी हो जाता है तो इसे वहीं पर जला दिया जाता है। इससे आस पास भारी दुर्गंध फैलती है और धूआं उठता है। जिससे काफी प्रदूषण फैलता रहता है।
इनडोर में भर्ती मरीजों को काफी परेशानी पड़ती है। यहां पर मेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए वाराणसी की एक संस्था का कांटेक्ट है इस संस्था का एक वाहन महीने में कभी कभार आकर कुछ वेस्टेज उठाकर खानापूरी कर जाता है।
इसी प्रकार जिला महिला अस्पताल पर भी कूड़ा पीपीसी के पीछे फेंका जाता है। आवारा कुत्तों की झुंड यहां पर मंडराते रहते हैं। यहां पर बगल में जूनियर हाई स्कूल है। दुर्गंध से वातावरण प्रदूषित होता है। यही हाल जिले के सभी सीएचसी पीएचसी का है सभी सरकारी अस्पतालों के आस पास ही कूड़ा फेंका और जलाया जाता है। प्राइवेट अस्पतालों की बात करें तो जिला मुख्यालय पर फातिमा अस्पताल ही है ऐसा है जिसके पास कूड़ा निस्तारण सिस्टम गाइड लाइन के अनुरूप है वरना सारे निजी अस्पताल आस पास कूड़ा फेंकते हैं और वहीं पर जलाते हैं। बैंक आफ बड़ौदा के पीछे चलने वाले एक नीजी हड्डी