नगर के पुलिस लाइन स्थित प्राथमिक स्कूल।संवाद
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मऊ। सरकार की तरफ से परिषदीय विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष खड़ा करने की तमाम कवायद विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ जा रही है। जिले के परिषदीय विद्यालयों के सुंदरीकरण के लिए आपरेशन कायाकल्प योजना शुरू की गई, लेकिन तीन वर्ष बाद अभी तक 881 परिषदीय विद्यालयों में ही आपरेशन कायाकल्प के तहत कार्य पूरा हो सका है। नगरपालिका, नगर पंचायतों में आला अधिकारी बजट का रोना रो रहे हैं। जिले में 1208 परिषदीय विद्यालयों में 1,67651 बच्चे अध्ययनरत हैं। सरकार की तरफ से जिले के परिषदीय विद्यालयों में समस्त बुनियादी सुविधाएं बहाल करने के लिए वर्ष 2019 में ऑपरेशन कायाकल्प योजना शुरू की गई। शासन ने 19 पैरामीटर्स निर्धारित किए हैं। इसके मुताबिक ही विद्यालयों में निर्माण कार्य कराया जाना है। लेकिन अभी तक अभी तक 881 परिषदीय विद्यालयों में ही आपरेशन कायाकल्प के तहत कार्य पूरा हो सका है। ग्रामीण क्षेत्रों के परिषदीय विद्यालयों में कायाकल्प के तहत कार्य चल रहा है। इसके साथ ही अमिला, मुहम्मदाबादगोहना, दोहरीघाट, चिरैयाकोट, मधुबन, घोसी, वलीदपुर, दोहरीघाट सहित शहरी इलाकों के परिषदीय विद्यालयों में आपरेशन कायाकल्प के तहत कार्य शुरू नहीं हो सका है। आला अधिकारी बजट न होने की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ ले रहे हैं।इस बाबत जिला समन्वयक निर्माण तथा नोडल अधिकारी अजीत तिवारी का कहना था कि 73 प्रतिशत परिषदीय विद्यालयों में आपरेशन कायाकल्प का कार्य पूरा हो गया है। शेष विद्यालयों में निर्माण कार्य चल रहा है। नगरपालिका तथा नगर पंचायतों के परिषदीय विद्यालयों में निर्माण कार्य में अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं।