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भाव विभोर हुए लोग

Sun, 02 Oct 2016 11:21 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ मऊ
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भाव विभोर हुए लोग
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नगर क्षेत्र की एतिहासिक रामलीला का मंचन तीसरे दिन रविवार को छोटका पोखरा पर हुआ। यहां अयोध्या की सीमा पर पहुंचने के बाद प्रभु श्रीराम माता जानकी और भैया लक्ष्मण के संग रथ से उतर गए। यह बात रथ चला रहे सुमंत को अटपटी लगी। पहले तो सुमंत ने सोचा कि चलते-चलते प्रभु थक गए हैं, इस कारण थोड़ा आराम करने के लिए रथ से उतरे हैं। लेकिन रथ से उतरने के बाद प्रभु ने सुमंत को प्रणाम किया और उन्हें वापस अयोध्या जाने को कहा।
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इस पर सुमंत की आंखें नम हो गईं। वो प्रभु को समझाने और पिता राजा दशरथ की मंशा से अवगत कराया।इस दौरान भगवान श्रीराम ने सुमंत को समझाया, साथ ही उन्हें कुल की मर्यादा और पिता के वचन की याद दिलाते हुए वापस जाने का निवेदन किया।  इसके बाद प्रभु माता सीता और भाई लखन के साथ गंगा पार करने की योजना बनाने लगे। इस दौरान निषाद राज प्रभु को पहचान गया। उनके कहने पर भी वह नाव लेकर उनके पास नहीं आया।

बोला प्रभु मैं आप को पहचान गया हूं। आप वही हो जिसके पैर के स्पर्श मात्र से पत्थर महिला के रूप में परिवर्तित हो गई थी। ऐसे में आप के चरणों के स्पर्श से मेरी नइया तो डूब जाएगी।
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