दुबारी । बिंदटोलिया गांव में कटान होने के कारण गांव निवासी परिवारों के आशियाने और सहन की जमीन कट कर घाघरा में विलीन हो गई है । गांव स्थित काली मंदिर भी शुक्रवार को कट कर घाघरा में समा गया है। घाघरा का रौद्र रूप देखकर ग्रामीण अपना-अपना समान हटा कर सुरक्षित स्थान पर रख रहें हैं। बिंदटोलिया गांव के ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने ध्यान नही दिया तो पूरा गांव खतरे के चपेट आ जायेगा । वहीं, प्रशासन का दावा है कि सिंचाई विभाग बचाव के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
गांव निवासी हरी चौहान, राम अवध यादव, केदार यादव, सामा यादव, राम बिलाश, सुरेश यादव, सुबा यादव, शिवु यादव, देउ यादव, लक्षुमन चौहान, आदि की जमीन और मड़ई और डेरा सब कटकर घाघरा में विलीन हो गया। कटान पीड़ितों में हरी चौहान के पास रहने के लिए कुछ नहीं बचा है। कटान की पूरी जानकारी उपजिलाधिकारी लालबाबु दूबे मधुबन को दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि चार दिनों से बिंदटोलिया में कटान हो रही है। काली चौरा मंदिर भी कटान में नदी में समा गया। बिंदटोलिया गांव के ग्रामीणों चिंता सता रही है कि कैसे गांव बचेगा। घाघरा लाल निशान से दस सेमी ऊपर बह रही है। लोगों की धड़कने बढ़ गई हैं। दोहरी घाट में घाघरा नदी एक बार फिर खतरा के निशान से ऊपर चली गई है शुक्रवार को नदी का जलस्तर गौरी शंकर घाट पर खतरा बिंदु से 10 सेंटीमीटर ऊपर जा पहुंचा। घाघरा के इस तरह से बढ़ने के क्रम ने सभी को चिंतित कर दिया है। विदित हो कि इस वर्ष घाघरा तीसरी बार खतरा बिंदु पार कर चुकी है। गुरुवार को घाघरा का जलस्तर जहा 69.70 रहा वही शुक्रवार को जलस्तर 70.00 पर पहुंच गया। इस तरह बीते चौबीस घंटे में नदी के जलस्तर में 30 सेमी की वृद्धि हुई। धान की फसल के नदी के पानी में डूबने की आशंकाओं से किसान भी परेशान हैं। नगर की ऐतिहासिक धरोहरों मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, दुर्गा मंदिर, रामजानकी मंदिर, डीह बाबा का मंदिर शाही मस्जिद, हनुमान मंदिर आदि के अस्तित्व को लेकर नगरवासियों में चिंताएं बढ़ रही हैं। तटवर्ती इलाकों धनौली रामपुर, नवली, नई बाजार, बहादुरपुर, पतनई, सरया, ठाकुरगाव, जमीराचौराडीह, कोरौली, बेलौली, रसूलपुर, सुरजपुर आदि गांवों में बाढ़ आने की आशंकाओं ने लोगों की नींदें उड़ा दी है।