मौसम में बदलाव और उमस भरी गर्मी से बच्चों से लेकर बुजुर्ग वायरल बुखार की चपेट में आ रहे हैं। लोग उल्टी-दस्त के साथ ही पेट दर्द और तेज बुखार से भी पीड़ित हो रहे हैं। पहले ओपीड़ी 900 से एक हजार रहती थी अब 1200 हो गई है।
इसकी वजह से खून जांच कराने पर प्लेटलेट्स भी कम मिल रहा है। ऐसे मरीजों को चिकित्सक डेंगू संदिग्ध मानकर उपचार कर रहे हैं। चिकित्सकों की मानें तो मरीजों की जांच में डेंगू नहीं है, लेकिन प्लेटलेट्स 60 से 70 हजार तक आ रहे हैं।
जिससे खतरा बना रहता हैं। मरीज को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। जिला अस्पताल में शुक्रवार को फिजिशियन की ओपीडी में 175 मरीज उपचार के लिए पहुंचे।
यहां डॉ. अनिल कुमार, डॉक्टर शैलेश कुशवाह और डॉक्टर मुहम्मद आमिर ने मरीजों को देखा। कई दिन से वायरल बुखार न छोड़ने व थकावट की शिकायत पर चिकित्सक खून जांच की सलाह दी तो 28 मरीजों की जांच में प्लेटलेट्स कम आए।
फिजिशियन डॉक्टर शैलेश कुशवाह ने बताया कि 50 हजार से कम प्लेटलेट्स वाले मरीजों को भर्ती कर उनका उपचार किया जा रहा है। चिकित्सकों की माने तो प्लेटलेट्स रक्त के थक्के बनाने में मदद करते हैं, और उनकी संख्या कम होने पर रक्तस्राव की समस्या हो सकती है।
यदि प्लेटलेट्स की संख्या बहुत कम हो जाती है तो जानलेवा साबित होती है। मेडिकल वार्ड में रोज तीन चार मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। जिसमें गंभीर एक दो मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाया जाता है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर धनंजय कुमार ने बताया कि नियमित अंतराल पर बुखार आना, ठंड लगने के साथ बुखार आना, जोड़ों के पास तेज दर्द होना, चेहरे पर सूजन और उल्टी होना आदि पर घबराने की जगह फिजिशियन से सलाह पर दवा का सेवन करें। बताया कि वायरल बुखार के मरीजों को कम प्लेटलेट्स की शिकायत आ रही है। अस्पताल में प्लेटलेट्स व दवाएं मौजूद है।
प्लेटलेट्स बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों की बढ़ी डिमांड
वायरल बुखार के सीजन में प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए खाद्य आयटमों की डिमांड बढ़ गई है। ऐसे में लोग नारियल पानी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। शहर में रोज 300 सौ से अधिक नारियल की ब्रिकी है। इसके अलावा कीवी फल भी पसंद आ रहे हैं। नारियल पानी 60 से 70 रुपये में बिक रहा है। कीवी 20 से 30 रुपये प्रति पीस के बिक रहा है।
सेपरेशन यूनिट न होने से ब्लड बैंक बना शोपीस
जिला अस्पताल में ब्लड बैंक है लेकिन यहां सेपरेशन यूनिट न होने से यह प्लेटलेट मरीजों के लिए ब्लड बैंक शोपीस बन कर रह गया है। ऐसे में इन मरीजों के लिए यहां प्लाज्मा न मिलने से उन्हें निजी ब्लड बैंक पर निर्भर रहना पड़ रहा है।