गर्मी के चलते रविवार दोपहर में नगर में इस तरह रहा सन्नाटा।
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गर्मी ने लोगोें को बेहला करना शुरू कर दिया है। रविवार को पारा जहां 42 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा वहीं दिनभर पछुआ शरीर को झुलसाती रही। बाजारों में सन्नाटा पसर गया और जरूरी काम से निकले लोग भी अपने हो धूप से बचाने और जल्द से जल्द गंतव्य तक पहुंचने का जतन करते रहे। उधर, कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो मौसम खेती किसानी के लिए उपयुक्त है। पछुआ से कटाई मड़ाई आसान होगी तो खरीफ की अच्छी पैदावार होगी। साथ ही कीट पतंगों का खत्मा भी हो जाएगा। गर्म पछ़ुआ हवा चलने के कारण नगर सहित जिले की प्रमुख बाजारों में सुबह 11 बजे के बाद ही सन्नाटा रहा। गर्मी से बचने के लिए लोग भी परेशान रहे।
गन्ने का रस, आइसक्रीम, आम का पन्ना और कोलड्रिंक्स की दुकानों पर पर लोग गर्मी से राहत पाने के लिए रुकते रहे। एक पखवारे के अंदर दो बार बारिश हो जाने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। अब मौसम में बदलाव होने के चलते दिन भर पछुआ हवा चलने से तापमान में वृद्धि दर्ज की गई। तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रहा। 26 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चलती रही। अप्रैल माह बीतने में चंद दिन ही शेष रह गए हैं। लेकिन मई व जून माह की तरह गर्मी महसूस होने लगी है।
अधिकतम तापमान के कारण रात में भी लोग गर्मी से बेहाल रहे। दोपहर के समय सड़कों तथा बाजारों में सन्नाटा पसर गया। तापमान बढ़ने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी राहगीरों को उठानी पड़ रही थी। झुलसा देने वाली गर्मी से अधिकतर लोग घरों में ही दुबके रहे। जो किसी जरूरी काम से निकले भी तो अपने को बचाते हुए जल्द से जल्द गंतव्य तक पहुंचने को बेताब रहे। रोजमर्रा के काम करने वाले भी दोपहर में सुस्ताते देखे गए। जरूरी कामों से निकलने वाले भी शाम होने के इंतजार में घरों में दुबके रहे। स्वयंसेवी संस्था नेफोर्ड के चेयरमैन तथा पूर्व कृषि वैज्ञानिक डॉ. राम कठिन सिंह का कहना था कि पछुआ हवा चलने से तापमान बढ़ा है। फसलों की कटाई मड़ाई के लिए अनुकूल समय है।
तेज धूप से खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट नष्ट हो जाएंगे। इससे खरीफ फसल में पैदावार बढ़ेगी। जायद फसल मूंग, उर्द, सोयाबीन आदि की बुआई के लिए उपयुक्त समय है। उन्होंने सब्जियों तथा चारे की फसल की आवश्यकता के अनुरुप किसानों से सिंचाई करते रहने की अपील की।