नगर क्षेत्र के सबसे संवेदनशील स्थान संस्कृत पाठशाला और शाही कटरा का मैदान शुक्रवार को आपसी सौहार्द का गवाह बना। दोनों समुदाय के हजारों लोगों के बीच एक ही स्थान पर मुहर्रम के ताजिये जुलूस और भरत मिलाप का आयोजन अपने आप में सौहार्द की मिसाल है। प्रशासन ने इसके लिए नगर की जनता को बधाई दी। कहा, जनता के सहयोग से यह संभव हुआ।
शुक्रवार की रात के करीब नौ बजे से ही नगर क्षेत्र के संस्कृत पाठशाला पर काफी चहल पहल हो गई। अधिकारियों की मौजूदगी में या हुसैन या हुसैन के नारों के बीच शहर के संस्कृत पाठशाला से होकर शहर का ताजिया जुलूस गुजरा।
जुलूस शाही मस्जिद के मैदान जहां पर भरत मिलाप के आयोजन होना था। वहां से होकर गुजरा। वैसे तो अमूमन इस ताजिया जुलूस के गवाह मुस्लिम बंधु और फोर्स के लोग ही अधिकांश होते थे। लेकिन शुक्रवार को इस आपसी सौहार्द के गवाह बने भरत मिलाप देखने पहुंचे हजारों हिंदू भी । जिन्होंने ताजिया के जुलूस को देखा।
ताजिया जुलूस की समाप्ति के बाद कुछ देर में श्रीराम पुष्पक विमान पर भ्राता लक्ष्मण, सीता व हनुमान के साथ शाही कटरा के मैदान यानि भरत मिलाप के मैदान पर पहुंचे। वहां पर परंपरागत तरीके से मस्जिद के गेट से विमान का स्पर्श कराया गया। जो आपसी सौहार्द का सबसे बड़ा प्रतीक है।
इसके साथ ही लोगों ने रामकाल में गाए गए नारदीय गीत को प्रस्तुत किया। सुबह की अजान अल्लाह हो अकबर के साथ ही हर-हर महादेव और जयश्रीराम की जयकारे यह बताने के लिए काफी थे कि मऊ शहर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बनने जा रहा। इसके बाद ही सूरज की पहली किरण के बीच राम और भ्राता लक्ष्मण गले मिले।
इस दृश्य के भी गवाह बने सैकड़ों मुस्लिम परिवार, जो शाही मस्जिद के बगल स्थित अपने अपने घरों से भरत-मिलाप को देख रहे थे। भरत मिलाप के सकुशल बीत जाने के बाद जिला प्रशासन के अधिकारियों ने राहत की सांस जरूर ली। लेकिन जो भी कहें पूरे भारत में इससे बड़ी सांप्रदायिक सौहार्द का जीता जागता उदाहरण शायद ही कहीं आर आपको नजर आए।