कलेक्ट्रेट में बदहाल पड़ी स्थापित स्व.झारखंडे राय की प्रतिमा ।संवाद
मऊ। देश की आजादी और नवनिर्माण में अप्रतिम योगदान देने वाले महापुरुषों की प्रतिमाएं जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते बदहाली का शिकार हैं। जिन्हें नमन कर आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा लेनी चाहिए, वे प्रतिमाएं आज धूल, पक्षियों की बीट और गंदगी के साये में अपनी पहचान खो रही हैं। कलेक्ट्रेट परिसर से लेकर कस्बों तक इन धरोहरों का यही हाल है।
जिला प्रशासनिक व्यवस्था के केंद्र कलेक्ट्रेट परिसर में स्थापित दो स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और पूर्व सांसद स्व. जयबहादुर सिंह व स्व. झारखंडे राय की प्रतिमाएं इस समय उपेक्षा का दंश झेल रही हैं। कलेक्ट्रेट आने-जाने वाले आला अधिकारियों और कर्मचारियों की नजर रोज इन प्रतिमाओं पर पड़ती है, लेकिन इसके बावजूद इन पर जमी धूल की परतें साफ करने की सुध किसी को नहीं है।
इसके अलावा नगर के गाजीपुर तिराहे पर लगी पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का भी रंग रोगन नहीं कराया गया है। यहां भी बदहाली का आलम देखा जा सकता है।
यही हाल घोसी स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा का भी है। सत्य और अहिंसा का संदेश देने वाले बापू की यह प्रतिमा लंबे समय से रखरखाव के अभाव में उपेक्षित पड़ी है। यहां मनोनीत सभासद के सवाल उठाने के बाद थोड़ा रंगरोगन तो जरूर कराया गया, लेकिन इसके अलावा केवल स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और महात्मा गांधी जयंती पर ही इसकी सफाई कराई जाती है। इसके अलावा साल भर यह प्रतिमा धूल फांकती रहती है।