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मरीजों को नहीं मिल पा रही सस्ती दवाएं

Mon, 26 Nov 2018 10:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
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जिला अस्पताल परिसर स्थित प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र। - फोटो : अमर उजाला
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सरकार की तरफ से आम लोगों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने की तमाम कवायद विभागीय उदासीनता के चलते फ्लाप साबित हो रही है। निजी अस्पताल के चिकित्सक तो दूर सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक भी कमीशन के चक्कर में मरीजों को एक अलग से पर्ची पर ब्रांडेड दवाएं ही लिखकर थमा दे रहे हैं।
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स्थिति यह है कि जिला अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सकों के पास जेनरिक दवाओं की सूची तक उपलब्ध नहीं है। जिले में खोले गए17 प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। कारण प्रचार प्रसार का कागजों पर चलाया जाना है। सब कुछ जानते हुए अधिकारी मौन हैं।

गंभीर बीमारियों में प्रयोग होने वाली जीवन रक्षक दवाओं के बढ़ते दाम से  गरीब मरीजों की पहुंच से दूर हो रही थी। सरकार ने गरीबों की परेशानी को देखते हुए सस्ते दामों पर जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जिले में 17 प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले गए हैं।
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जिला महिला चिकित्सालय सहित छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जन औषधि केंद्र की दुकानें प्रस्तावित हैं। इन दुकानों पर लगभग 400 प्रकार की अच्छी और गंभीर बीमारियों में प्रयोग होने वाली दवाएं उपलब्ध हैं।  प्राइवेट को छोड़ दिया जाए तो सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों की ओर से लिखे गए दवाईयों के पर्चों पर ब्रांडेड दवाएं ही लिखी मिल रही है। हालांकि कुछ सरकारी चिकित्सक एक दो जेनरिक दवाएं लिखकर महज खानापूर्ति कर ले रहे हैं।

 विभाग की तरफ से भी व्यापक प्रचार प्रसार न होने से जेनरिक दवाओं के बारे में लोगों को जानकारी तक नहीं हो पा रही है। जिला अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सकों के पास जेनरिक दवाओं की सूची तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है।

ब्रांडेड दवाओं से मोहभंग नहीं होने से मरीजों को सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं, ब्रांडेड दवा के थोक और अधिकतम खुदरा मूल्य में भारी अंतर होता है। ऐसे में मरीज लुट रहे हैं। कमीशन के चक्कर में चिकित्सक ब्रांडेड दवाओं को लिखने का मोह नहीं छोड़ पा रहे।

पंजीकृत निजी अस्पतालों से लेकर नर्सिग होम और क्लीनिक तक ब्रांडेड दवाएं लिखने का चलन है।  कंपनिया दवा पर थोक मूल्य से 300 फीसदी से अधिक तक खुदरा मूल्य अंकित कर रही हैं।  


जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी के चिकित्सकों के यहां जेनरिक दवाओं की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। औचक निरीक्षण में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. सतीश चंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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