बीते चार वर्षों से डेंगू रहित रहे जिले में डेंगू का प्रकोप दिनों दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। डेंगू से दो लोगों की मौत की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग कर चुका है। बावजूद अब भी जिले में जांच तथा स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। हालात यह है कि जिले में किट में सरकारी और निजी अस्पतालों में जहां 446 मरीज मिल चुके हैं। जबकि एलाइजा जांच में 25 मरीजों की पुष्टि विभाग ने किया, बावजूद डेंगू के मरीजों ने सरकारी अस्पतालों से दूरी बना रखी है। जबकि जिले में 30 बेड के कोविड अस्पताल को डेंगू अस्पताल में तब्दील करने के साथ जिला अस्पताल में छह वार्ड सहित सभी सीएचसी पर छह-छह बेड के डेंगू वार्ड बनाए गए हैं। लेकिन मरीज सरकारी के बजाए निजी अस्पतालों में उपचार कराने को पहुंच रहे हैं।
शासन के स्पष्ट निर्देश है कि डेंगू के रोकथाम को लेकर जिलों में जिला स्तर पर अस्पताल में कम से कम 20 बेड का वार्ड मरीजों के लिए बनाया जाए। वहीं, सीएचसी स्तर पर भी अलग से वार्ड बनाए जाए। शासन के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग ने गत दिवस परदहा स्थित 30 बेड के एल-2 कोविड अस्पताल को वर्तमान में कोरोना संक्रमण के एक भी मरीज न होने की स्थिति में उसे डेंगू वार्ड में तब्दील कर दिया। वहीं जिला अस्पताल में छह बेड के अलावा मुहम्मदाबाद गोहना, रतनपुरा, फतेहपुर मंडाव, दोहरीघाट, कोपागंज, बड़राव, घोसी सहित सभी दसों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर छह-छह बेडों का डेंगू वार्ड बनाया गया है। वर्तमान में न तो जिला अस्पताल में कोई मरीज भर्ती है न ही डेंगू अस्पताल में। लेकिन निजी अस्पतालों में बेडों के खाली न होने की स्थिति बनी हुई है। डेंगू का डंक होने के बाद भी लोग सरकारी के बजाए निजी अस्पताल में उपचार कराने को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। उधर स्वास्थ्य विभाग के दावे को गौर करे तो अब तक उनके द्वारा जिले में 5 हजार 677 लोगों की जांच बृहस्पतिवार की शाम तक की जा चुकी है। इसमें स्वास्थ्य विभाग के अनुसार दो मरीजों की मौत डेंगू से हुई है। जिसमें एक की मौत नगर के एक निजी अस्पताल में तो दूसरी की मौत बीएचयू में इलाज के दौरान हुई है।
सीएमओ बोले-व्यवस्थाएं चौकस
सीएमओ डॉ. नरेश अग्रवाल ने बताया कि डेंगू के रोकथाम को लेकर टीम गठित कर अलग से जिले में 30 बेड का डेंगू अस्पताल बनाया गया है। वहीं जिला अस्पताल सहित सभी सीएचसी पर डेंगू वार्ड बनाने के साथ एंटीलार्वा समेत डीडीटी का छिड़काव शहर से लेकर देहात इलाकों तक कराया जा रहा है। ताकि किसी भी स्तर पर मच्छर न पनपें।