पवनी माइनर में नाली की तरह बह रहा पानी, किसान परेशान।संवाद
मऊ/मझवारा। सावन के तीन दिन बीत गए लेकिन पर्याप्त बारिश न होने से खेती-किसानी पर संकट गहराने लगा है। माइनरों में पानी न छोड़े जाने से धान की फसल मुरझाने लगी है। खेतों में दरारें पड़ गई हैं। खरीफ सीजन में पवनी माइनर में पानी न छोड़े जाने से खेती-किसानी पर संकट गहराने लगा है। इस माइनर से क्षेत्र के विभिन्न गांवों की लगभग एक हजार एकड़ कृषि योग्य भूमि की सिंचाई होती है। किसान शिवशरण पांडेय, मोहन कुमार, मनोज मिश्रा, रामजन्म यादव और जगत नारायण ने बताया कि माइनर में नाली की तरह पानी बह रहा है।
नहर में सिल्ट, मिट्टी और खरपतवार जमा होने से पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा है। इससे सिंचाई प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों को शिकायती पत्र दिया गया था। जल्द पानी छोड़ने का आश्वासन भी मिला, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। संवाद
खरपतवार से पटी शारदा सहायक खंड-32
कुसुम्हा। खरीफ सीजन में क्षेत्र से गुजरने वाली शारदा सहायक खंड-32 खरपतवार से पटी है। जुलाई माह बीत जाने के बाद भी नहर में पानी नहीं छोड़ा गया है, जिससे धान की फसल प्रभावित हो रही है। किसान अरविंद राय, कक्कू राय, बृजभूषण शरण सिंह और अरविंद राय ने बताया कि लगभग एक बीघे में धान की रोपाई कराने में तीन से चार हजार रुपये की लागत आई है। उनका कहना है कि यदि इसी तरह सूखे की स्थिति बनी रही तो खेती की लागत डूब जाएगी। किसानों ने शासन से आर्थिक पैकेज देने की मांग की है। संवाद
वर्जन
शारदा सहायक खंड 32 मुख्य नहर में लखीमपुर जिले से पानी छोड़ा जाता है। नदी में पानी कम रहने से कम पानी छोड़ा जा रहा है। अभी पानी छोड़ा गया है, लेकिन 20 किमी दूर है। मुख्य नहर में शीघ्र ही पानी आ जाएगा। - शिवशंकर, सहायक अभियंता, शारदा सहायक खंड 32