उत्तर प्रदेश किसान सभा के सदस्यों ने बिजली वितरण के निजीकरण और स्मार्ट मीटर लगाने के खिलाफ कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। राज्यपाल को संबोधित सात सूत्री ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिजली हमारी बुनियादी जरूरत है। पेयजल, नलकूप, खेती, उद्योग बुनकरी यातायात से लेकर मोबाइल इंटरनेट सहित सभी क्षेत्र बिजली पर निर्भर है। सरकार की नई बिजली नीति से उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ा है। निजी बिजली कंपनियों के लाभ के लिए उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विद्युत नियामक आयोग ने बिजली का मूल्य 23 फीसदी तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। किसान किसी भी कीमत पर इसे स्वीकार नहीं करेगा। केंद्रीय बजट में कृषि संकट, बेरोजगारी से निपटने के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य और कर्मचारियों के वेतन आयोग की संस्तुति नहीं हुई है। इसमें पर विशेष बल दिया गया है। प्रदर्शनकारियाें ने सभी फसलों पर लागत का डेढ़ गुना एमएसपी की गारंटी, किसान का कर्ज माफ करने, खाद, बीज, कीटनाशक आदि को कर मुक्त करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि मनरेगा के बजट को कम कर दिया गया। इससे गरीबों की तकलीफ बढ़ेगी। इस अवसर पर अब्दुल अजीम खां ,वीरेंद्र कुमार, शेर मोहम्मद, बसंत कुमार, रोशन चौहान, कैसर अली, रोपन पाल, उमेश चौहान, ब्रह्मदेव राजभर, मोहम्मद हसन, चंददेव, मनोज यादव आदि शामिल रहे।