सरकार ने छात्रवृत्ति घोटाले में आ रही शिकायतों को दूर करने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई पिछले दो सालों से छात्रवृत्ति के लिए आनलाइन आवेदन की प्रक्रिया है। आवेदन को सत्यापित करने और त्रुटियों को संशोधित करने की जिम्मेदारी स्कूलों-कालेजों के प्रधानाचार्यों को दी गई है।
लेकिन आनलाइन आवेदनों में इतनी भारी संख्या में त्रुटियां रह जा रही हैं कि एनआईसी लखनऊ से आवेदन ही निरस्त हो जा रहे हैं। ऐसे में छात्रवृत्ति से वंचित होना पड़ रहा है। यही वजह रही कि पिछले शिक्षण सत्र में लगभग 60 फीसदी छात्रों का आवेदन निरस्त हो गया उन्हें छात्रवृत्ति नहीं मिली। छात्र इसके लिए परेशान होकर आए दिन प्रदर्शन आदि कर रहे हैं।
पिछले शिक्षण सत्र में पूर्व दशम यानी कक्षा नौ और दस के अनारक्षित वर्ग के 497 और अनुसूचित जाति के 3917 छात्रों को छात्रवृत्ति मिल सकी। जबकि कक्षा 11 , 12 अथवा इससे ऊपर की कक्षाओं में पढ़ने वाले 1489 अनारक्षित वर्ग के छात्रों को तथा अनुसूचित जाति के दस हजार 152 छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई। जबकि ओबीसी वर्ग के 2641 छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई। लेकिन इसके विपरीत सभी वर्गों के कुल 28 हजार 146 छात्रों ने छात्रवृत्ति के लिए आनलाइन आवेदन किया था।
भारी संख्या में छात्रवृत्ति से वंचित छात्र जब जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में जाकर शिकायत करते हैं तो उन्हें जवाब मिलता है कि आपका आवेदन ही रिजेक्ट हो गया है। आवेदन करते समय हुई गलती से उन्हें अब छात्रवृत्ति नहीं मिल पाएगी। आवेदन की जटिल प्रकिया और सत्यापन करने वाले प्रधानाचार्यों की ओर से बरती जा रही लापरवाही का नतीजा है कि पिछले दो सत्रों से कई कालेजों के छात्रों को छात्र वृत्ति नहीं मिली। इसके विरोध में छात्रों द्वारा पुतला दहन , विरोध प्रदर्शन, डीएम को ज्ञापन आदि सौंपे जा रहे हैं।