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रखरखाव के लिए केवल 25 रुपये

Sat, 13 Aug 2016 11:50 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
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animals - फोटो : amar ujala
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गो-सेवा रक्षा के नाम पर काफी शोर मचने के बाद भी गायों के पालन पोषण की शासन प्रशासन की तरफ से कोई पुख्ता  इंतजाम नहीं किया जा सका है। स्वयंसेवी संगठन की तरफ से संचालित होने वाली गो-शाला को शासन प्रशासन की ओर से एक पाई की आर्थिक मदद नहीं मिलती। आश्चर्यजनक स्थिति यह है कि तस्करों से पकड़ी गईं गायों को नगर के दशई पोखरा स्थित गोपाल गोशाला में छोड़ दिया जाता है।
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न्यायालय के आदेश पर जब तस्कर गायों को ले जाते हैं गोशाला को 25रुपये प्रति गाय के हिसाब से वहन करते हैं। इससे गोशाला में रहने वाली गायों को भरपेट चारा नहीं मिल पाता। जबकि मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के अनुसार एक गाय के रख रखाव और खुराकी पर कम से कम 100 रुपये का खर्च आता है। पदाधिकारियों की शिकायत के बाद भी प्रशासन के स्तर पर मामले को लटका दिया गया है।   

 
जिले में दो गो-शालाएं संचालित हैं लेकिन गो-सेवा रक्षा के नाम पर शासन और प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्ययोजना तैयार न किए जाने से दोनों की दशा काफी खराब है। नि:शक्त तथा वृद्ध गाय पालने वाले स्वयंसेवी संस्थाओं को प्रोत्साहित तक नहीं किया जाता । नगर के माता पोखरा स्थित गोपाल गो-शाला है। यहां वरवक्त 76 गाय हैं, जो वृद्ध हो चली हैं।  लेकिन उन्हें कही से कोइ आर्थिक मदद नही दी जाती। इसका परिणाम है कि आज गोशाला बदहाल स्थिति में हैं।
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यहां स्वयंसेवी संगठन के चंदे के सहयोग से गायों का पालन पोषण किया जा रहा है। हद तो तब हो जाती है जब तस्करों से पकड़ी गायों को भी पुलिस जबरदस्ती वहां छोड़ जाती है। तस्कर जब तक न्यायालय से गायों को छुड़ाते है, तो गोशाला को प्रतिदिन 25रुपया प्रति गाय के हिसाब से भुगतान करते हैं, जबकि मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के डायट चार्ट के मुताबिक कम से कम 100 रुपये खर्च आता है।

तस्कर न्यायालय के आदेश की बात कहते हैं जबकि प्रशासनिक अधिकारी डायट खर्च बढ़ाने का शासनादेश न होने की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं। गोपाल गो शाला के पदाधिकारियों की मानें तो क्षमता से अधिक गायों के होने से बजट गड़बड़ा जाता है। आहार कम मिलने से गायों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। पशुपालन विभाग के उदासीन रवैए से पशु चिकित्सक भी गायों के स्वास्थ्य की जांच करने तक नहीं आते।

इस संबंध में गोपाल गोशाला के व्यवस्थापक बाबू लाल अग्रवाल का कहना है कि  गोशाला का संचालन सदस्यों के चंदे से होता है। प्रशासन की तरफ से कोई आर्थिक सहयोग नहीं मिला।  तस्करी में पकड़ी गई गायों के आने पर गायों की संख्या बढ़ जाती है, ऐसे में और दिक्कत खड़ी हो जाती है। गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष अमित त्रिपाठी ने गोशाला का निरीक्षण भी किया था बावजूद आज तक सुधि लेने की जहमत तक नहीं उठाई जा सकी है।
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