जिला अस्पताल की कॉलोनी में बाहरी लोगों के अवैध कब्जे को लेकर अगस्त में आदेश जारी किया गया था। आदेश के एक माह बीतने के बाद भी अभी तक जिला अस्पताल की कॉलोनी पर अवैध कब्जा को खाली करने के लिए कोई कवायद नहीं हो सकी है। आलम यह है कि जिला अस्पताल में बीते दिनों स्थानांतरण के बाद आए पैरामेडिकल स्टाफ को अन्य कर्मचारियों को आवास आवंटन करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आवास नहीं होने से महिला कर्मचारियों को चिकित्सालय में काम करने में भी परेशानी हो रही है।
जिला अस्पताल की कॉलोनी में 102 आवास हैं। इसमें अस्पताल के चिकित्सक से लेकर अन्य सभी कर्मियों के रहने के लिए आवास बने हैं। लेकिन इन आवासों में अभी भी गैर जनपद स्थानांतरण होने के बाद भी लोग जमे हुए हैं। वहीं कुछ कर्मी ऐसे भी हैं जो जनपद की अन्य सीएचसी या पीएचसी पर तैनात या महिला अस्पताल या टीबी क्लीनिक से संबद्ध हैं। बीते दिनाें आवास पर कब्जे को लेकर मिली शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन ने आवास में रहने वालों का आधार कार्ड, बिजली कनेक्शन, पैन, एचआरए का कागज की जांच करने को कहा था। लेकिन अभी तक उसे दस्तावेज को लेने के लिए कोई पहल नहीं हो सकी है। जानकारी के मुताबिक, अस्पताल के आवासों पर 25 वैध लोग ही हैं। 30 आवास पर अन्य स्वास्थ्य केंद्र और गैर जनपद स्थानांतरण होने के बाद भी लोग आवास पर कब्जा किए हुए है। अभी हाल ही में जिला अस्पताल में स्थानांतरण होने के बाद आने वाले स्वास्थ्य कर्मियों ने डीएम प्रवीण मिश्र को आवास दिलाने के लिए पत्र लिखा था। उसके बाद अभी तक कोई पहल नहीं की जा सकी है।
सीएम को पत्र लिखकर की गई शिकायत
कॉलोनी में अवैध कब्जा को लेकर नगर के पूर्व सभासद छोटे लाल गांधी ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा था। सीएम के यहां से अस्पताल का कॉलाेनी को खाली कराने के लिए शासन से पत्र आने के बाद भी उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि जिन लोगों ने आवास पर कब्जा किया है वह सरकार से एचआरए के रूप में हर माह दो से तीन हजार रुपये लेते है।
जिला अस्पताल की कॉलोनी में बाहरी सहित गैर जनपद में स्थानांतरण होने वाले या अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से संबद्ध लोगों के निवास करने वालों की सूची बनाई जा रही है। सोमवार को पूरी सूची बनाकर सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी जाएगी।- डॉ. धनंजय कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल