मऊ। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव बीतने के बाद अब राजनेता जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए बिसात बिछाने लगे हैं। वे अपने करीबियों को इन पदों पर बैठाने के प्रयास में हैं जबकि पुराने कई दिग्गज और उनके परिजन और करीबी चुनाव हार गए हैं। अब नये समीकरण के लिए मंथन का दौर चल रहा है।
वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष और भाजपा की उर्मिला जायसवाल की बहू नर्मदा चुनाव हार गई हैं। भाजपा नेता डा. एचएन सिंह पटेल की पत्नी अनिता सिंह, सपा जिलाध्यक्ष धर्मप्रकाश यादव की पत्नी और दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी अंशा यादव भी चुनाव हार चुकी हैं। विधायक सुधाकर सिंह की नजर भी जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर थी। इन्होंने अपनी बहू को गोधना से जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ाया था। वह भी चुनाव हार गईं। सपा के केवल दो ही अधिकृत प्रत्याशी चुनाव जीत पाए हैं हालांकि सपा समर्थक 12 बागी प्रत्याशी चुनाव जीतने में कामयाब हुए है। इस तरह से देखा जाए तो इस बार 12 बागियों और दो अधिकृत प्रत्याशियों को मिलाकर सपा समर्थित 14 लोग जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए हैं। दूसरी तरफ पार्टी वाइज बसपा के सदस्य सबसे ज्यादा चुनाव जीते है, इनकी संख्या सात है। लेकिन बसपा की ओर से अभी तक कोई चर्चित चेहरा सामने नहीं आया है। लेकिन अंदर खाने बसपा खेमे में भी मंथन शुरु हो गया है। भाजपा के अधिकृत दो प्रत्याशी ही चुनाव जीते हैं। इनमें मनोज राय और अखिलेश राजभर हैं। मनोज राय की नजर भी जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर है, भले ही भाजपा के दो प्रत्याशी ही चुनाव जीत पाए हैं , लेकिन मनोज राय अपने व्यक्तिगत प्रभाव से अन्य सदस्यों को भी अपने पाले में करने के लिए सक्रिय हैं।