मऊ। रतनपुरा ब्लाक के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय पर 25 सालों से अध्यापक पद पर तैनात रही रंभा पांडेय ने महराजगंज जनपद के एक प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका पर कार्यरत रही थी।मामला प्रकाश में आने पर मऊ के हलधरपुर थाने में रंभा पांडेय और ममता राय के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। रंभा तो बलिया जिले के पांडेयपुर गांव की निवासी है लेकिन ममता राय का कोई अता पता नहीं है। पुलिस के सामने ममता को ढूंढ़ना चुनौती भरा काम है।
जांच के दौरान प्रकाश में आए विभागीय अभिलेखों के अनुसार ममता राय पुत्री भगवान राय की प्रथम नियुक्ति जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महाराजगंज के पत्रांक अर्थ-1/बीटीसी 95-96 के अनुसार 22 अगस्त 1995 को कन्या प्राथमिक विद्यालय मिठौरा शिक्षा क्षेत्र मिठौरा जनपद महराजगंज पर हुई थी। पांच साल तक नौकरी करने के बाद ममता ने अपने जिले के नजदीक आने की सोची। इसके तहत उसने ओदन किया और अंतर्जनपदीय स्थानांतरण नीति के तहत सचिव बेसिक शिक्षा के आदेश पर14 अगस्त 2000 को ममता राय का स्थानांतरण मऊ के ग्रामीण क्षेत्र के लिए हुआ।
दो साल बाद बीएसए महाराजगंज ने ममता राय को 04 सितंबर 2000 को मऊ के लिए कार्यमुक्त किया। बीएसए मऊ के आदेश पर 06 नवंबर 2000 को ममता राय को प्राथमिक विद्यालय बेलौझा-1 पर तैनात किया गया। इसके बाद प्रोन्नति पाकर वह उच्च प्राथमिक विद्यालय मुबारकपुर पहुंच गई। मामले का खुलासा होने पर उसके तथा ममता राय के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा दिया गया।
रंभा पांडेय पुत्री शिवनाथ पांडेय बलिया जिले के पांडेयपुर की निवासी है। फर्जीवाड़ा प्रकाश में आने के बाद फर्जी शिक्षिका का पता लगाने के लिए बीएसए महराजगंज को पत्र भेजा गया। जांच के आधार पर यह पता चला कि रंभा ने ही ममता के नाम पर महराजगंज में पांच साल तक नौकरी की थी। इस बारे में बीएसए महराज गंज का कहना है कि ममता राय के स्थानांतरण आदेश का सत्यापन कराया गया है। उसका स्थानांतरण अगस्त 2000 में यहां से मऊ के लिए हो गया था। उसे यहां से कार्यमुक्त किया गया था।इस संबंध में एसओ हलधरपुर डीपी श्रीवास्तव का कहना है कि रंभापांडेय ही ममता राय के नाम पर फर्जी तरीके से नौकरी कर रही थी। उसकी तलाश की जा रही है।