मऊ। नगर पालिका क्षेत्र में दर्जनों जर्जर मकान मौत का सामान बनकर खड़े हैं। ऐसे 78 भवनों को नगर पालिका ने चिह्नित किया है। इन भवन स्वामियों को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है, ताकि मॉनसून के पूर्व भवन खाली कराए जा सकें। यदि बारिश के पूर्व इन जर्जर भवनों को खाली नहीं किया गया तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
मॉनसून सत्र से पूर्व नगर पालिका प्रशासन की ओर से अलग-अलग मुहल्लों के 78 जर्जर हो चुके भवन को चिह्नित किया जा चुका है, इसमें 15 से अधिक भवन मालिकों को नोटिस भी जारी किया जा चुका है, शेष को नोटिस देने की कवायद की जा रही है। जबकि इसके उलट जिले से नगर पंचायत कोपागंज, अमिला, अदरी, मधुबन, मुहम्मदाबाद गोहना, घोसी, वलीदपुर, चिरैयाकोट, कुरथीजाफरपुर, दोहरीघाट द्वारा अभी तक जर्जर भवनों को चिह्नित नहीं किया गया है। बतातें चलें कि शहर के कई हिस्सों में बनी संकरी गलियों में रोज बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना लगा रहता है। कई गलियों की हालत तो ऐसी है कि वहां दो बाइक एक साथ नहीं जा सकती हैं। जबकि इन गलियों में दशकों पहले बने मकान पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। इसमें कई जर्जर भवनों को नगर पालिका की ओर से पूर्व में जर्जर चिह्नित कर इसकी सूचना जिला प्रशासन को भेजी जा चुकी है। बारिश के मौसम में हर वर्ष शहर में किसी न किसी क्षेत्र में कोई जर्जर भवन गिरना आम बात है।
पिछले साल 64 इस बार 88 हैं संख्या
नगर पालिका की ओर से हर साल मॉनसून से पहले जर्जर भवनों को चिहिन्त किया जाता है। 2023 में नगर पालिका ने 66 जर्जर भवनों को चिह्नित किया था। जबकि 2022 में यह संख्या 61 थी। जबकि 2020 में यह संख्या 61 तक पहुंच गई। वहीं 2019 में यह संख्या 49 थी। सूत्रों की माने तो राजनीतिक दबाव और मिली भगत से भी जर्जर भवनों को चिह्नित करने में भेदभाव किया जाता है। जबकि सर्वे कार्य को पूरी पारदर्शिता से किया जाए तो यह संख्या 100 से ज्यादा पहुंच सकती है।
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इन मुहल्लों में हैं जर्जर भवन
जर्जर भवनों की बात करें तो भीटी, ब्राह्मणपुरा, हरिकेशपुरा, बल्लीपुरा, छेदापुरा, इब्राहिमाबाद, औरंगाबाद, मुंशीपुरा, सहादतपुरा, डोमनपुरा, रसूलपुर, घासीपुरा, रामपुर चकिया, बख्तावरगंज, गालिबपुर ,बड़ापोखरा, रघुनाथपुरा, यूसुफपुर, काजीटोला, पुराफिखन, बड़ी कम्हरिया, राजारामपुरा, प्यारेपुरा में जर्जर भवन चिह्नित किए गए हैं।
कोट
नगरपालिका क्षेत्र के अलग-अलग मुहल्ले के 78 जर्जर हो चुके भवनों को चिह्नित किया जा चुका है। कई भवन मालिकों को नोटिस भी जारी किया जा चुका है, शेष को नोटिस देने की कवायद की जा रही है।
दिनेश कुमार
अधिशासी अधिकारी
मऊ