कलेक्ट्रेट सभागार में जिला निगरानी समन्वय समिति की बैठक को संबोधित करते सांसद हरिनारायण राजभर, साथ में डीएम प्रकाश बिंदु।
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जनपद स्तरीय क्रियान्वयन एवं समन्वयन समिति की बैठक सांसद हरिनारायण राजभर की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई। सांसद ने बताया कि 73वें संविधान संशोधन के फलस्वरूप ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में प्रत्येक स्तर की भूमिका और कार्य पूर्णत: स्पष्ट हैं, जिसके अनुसार ग्राम पंचायत मुख्य क्रियान्वयन इकाई है।
73वें संविधान संशोधन अधिनियम के प्रभावी होने के बाद ग्राम पंचायतों द्वारा इस भूमिका निर्वहन प्रभावी ढंग से किया गया है। किन्तु किसी एक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संसाधनों का आकलन कर वार्षिक कार्य योजना तैयार नहीं की जाती रही है।जिससे संसाधनों का प्रभावी उपयोग नही हो पाया और दूसरी ओर ग्राम पंचायत के समग्र विकास को भी लक्षित नहीं किया जा सका है। 14वें वित्त आयोग के अनुशंसा के फलस्वरूप वर्ष 2015-16 से ग्राम पंचायतों को शत-प्रतिशत धनराशि हस्तानांतरण के दृष्टिगत योजना तैयार किया जाना अनिवार्य किया गया है।
वर्ष 2016-17 से ग्राम पंचायतों द्वारा वार्षिक कार्ययोजना तैयार कर प्लान प्लस पर अपलोड किया जा रहा है। परन्तु पर्याप्त संसाधनों एवं जागरूकता के अभाव में उनके द्वारा अपलोड की जाने वाली कार्य योजना मात्र निर्माण केन्द्रित हो रही हैं। ग्राम पंचायत विकास योजनान्तर्गत पिछले तीन वर्षो में पंचायतों को 2016-17 में 8121.17 लाख और 2017-18 में 9181.55 लाख रुपये और वित्तीय वर्ष 2018-19 में 4558.85 लाख हस्तांतरित हुए।