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कंसो में एक भी मतदाता के पास नहीं है जनजाति का प्रमाणपत्र

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हलधरपुर। रतनपुरा ब्लाक के कंसो ग्राम पंचायत को अनुसूचित जन जाति की महिला के लिए आरक्षित किया गया है। गांव के लोगों ने आपत्ति भी दाखिल किया था। लेकिन प्रशासन ने आपत्तियों को दरकिनार करके अनुसूचित जन जाति महिला के लिए ही आरक्षित कर दिया। गांव में एक भी मतदाता के पास अनुसूचित जन जाति का प्रमाणपत्र नहीं है।
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इसके पहले 1995 के आधार पर हुए आरक्षण में इस गांव को सामान्य महिला के लिए आरक्षित किया गया था। बाद में हाई कोर्ट के आदेश पर 2015 के आधार पर किए गए आरक्षण में इस गांव को अनुसचित जन जाति की महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया। गांव में लगभग दो हजार मतदाता हैं इनमें जनजाति नहीं हैं। इस गांव में गोंड़ और कमकर जाति के कुछ मतदाता हैं। प्रशासन के सूत्रों के अनुसार ये जातियां वर्तमान में अन्य पिछडा वर्ग के अंतर्गत आती हैं।गांव को अनुसूचित जन जाति महिला के लिए आरक्षित कर दिए जाने पर गांव के डा.केशव सिंह आजाद ,सत्यनारायण सिंह, विजय शंकर सिंह सहित लगभग दस लोगों ने आपत्ति कर कहा था कि इस गांव में एक भी अनुसूचित जन जाति के व्यक्ति नहीं है। इसलिए यह आरक्षण बदल कर संशोधित किया जाए। लेकिन आपत्तियों के निस्तारण के बाद भी इस गांव के आरक्षण में कोई बदलाव नहीं किया गया।
इस बाबत डा. केेशव सिंह आजाद का तर्क है कि गांव में एक भी अनुसूचित जन जाति नहीं है। गांव में गोंड़ और कमकर जाति के लोग हैं लेकिन उनके पास ओबीसी के प्रमाणपत्र हैं। उन्होंने कहा है कि जब प्रशासन ने अनुसूचित जन जाति महिला के लिए ग्राम पंचायत का आरक्षण कर दिया गया है तो प्रशासन को गोंड़ और कर्मकर जातियों को अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र भी जारी करना चाहिए।
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कोट
हाई कोर्ट के आदेश पर चुनाव आयोग की गाइड लाइन के अनुसार अवरोही चक्रानुक्रम के अनुसार आरक्षण किया गया है।
-घनश्याम सागर, जिला पंचायतराज अधिकारी
इनसेट
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित करने के लिए सीएम को लिखा पत्र
इंदारा । कोपागंज विकास खंड के इंदारा गांव निवासी अवधेश राम ने मुख्यमंत्री को प्रार्थनापत्र भेजकर 25 सालों में कभी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित न होने पर इंदारा ग्राम पंचायत को अनुसूचति जाति के लिए आरक्षित कराने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर गुहार लगाई है। सीएम को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि इंदारा गांव को 1995 से लेकर आज तक कभी भी अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित नहीं किया गया है।जबकि गांव में अनुसूचित जाति की जनसंख्या कुल जनसंख्या के 21 प्रतिशत है। अवधेश ने बताया कि इस बाबत हाई कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई है जिसकी सुनवाई 5 अप्रैल को हाईकोर्ट में होनी है।
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