मऊ। साइबर ठगों ने रुपये ऐंठने का नया पैंतरा अपनाया है। वह बाहर पढ़ रहे बच्चों की जानकारी जुटा कर उनके परिजनों को फोन कर बच्चों को झूठे मुकदमों को फंसाने की धमकी देकर रुपये ऐंठ रहे रहे हैं। दो महीने में ऐसे आठ मामले सामने आए हैं। पीड़ित परिजनों ने साइबर थाना पहुंच कर शिकायत दर्ज कराई है।
साइबर ठगों ने बाहर पढ़ रहे छात्रों के अभिभावकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब एक के बाद एक बीते दो महीने में आठ अभिभावकों को इस प्रकार के फोन आए। उन्होंने जागरूकता दिखाते हुए साइबर थाने पहुंचकर पुलिस को इससे अवगत कराया। पुलिस ने इन मामलों में जांच शुरू कर दी है। साइबर थाना में पहुंचे एक व्यक्ति ने बताया कि उनका बेटा जम्मू कश्मीर में पढ़ाई करता है। कुछ दिन पहले मेरे नंबर पर एक वॉटसअप वीडियो कॉल आई, जिसमें फोन करने वाला जम्मू कश्मीर के पुलिस अफसर की वर्दी में था। उसने बेटे का बोल कर पहचान कराई। उसके बाद कहा कि मेरा बेटा आतंकवादियों से मिला हुआ है। सेंटलमेंट कर लो नहीं तो बेटे का कॅरिअर बर्बाद हो जाएगा। साइबर ठग के बातों से अभिभावक इस कदर परेशान हो गए कि उन्होंने 50 हजार की रकम भी ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी, लेकिन खराब मोबाइल नेटवर्क के चलते पैसा ट्रांसफर नहीं हो हुआ। इसी तरह से एक मामला रानीपुर थाना क्षेत्र का है। जहां साइबर ठगों ने सीतापुर में पढ़ रही छात्रा के पिता को वाट्सअप कॉल करके बेटी को गलत कार्य में पकड़ने की बात कही। सेटलमेंट के नाम पर रकम ऐंठने का प्रयास किया, लेकिन जागरूक अभिभावकों ने सूचना साइबर पुलिस को दी। बीते दो माह में अब तक आठ अभिभावक फर्जी कॉल को लेकर साइबर थाना में शिकायत दर्ज करा चुके हैं।
-
एसपी बोले, जागरूक होने की जरूरत, आरोपी जल्द गिरफ्त होंगे
ठग सोशल मीडिया पर बनी आईडी से भी डाटा निकाल कर फोन कर ठगी कर रहे हैं। बाहर पढ़ रहे बच्चों का डाटा चुराकर अभिभावकों को फोन कर मोटी रकम मांगने के मामलों में पुलिस और साइबर टीम जांच कर रही है। बावजूद ऐसे में सभी को सावधान रहने की जरूरत है। अपील कि किसी भी तरह की गोपनीय सूचना सोशल मीडिया पर शेयर न करें. इसमें खासकर बच्चे जो इंस्टाग्राम या फेसबुक की बायोग्राफी में पसर्नल डाटा न डालें। ऐसे कॉल आने पर पहले तो अपने बच्चों से बात करें, साथ ही संबंधित जिले के पुलिस अधिकारियों को भी इस बारे में अवगत कराएं।
इलामारन जी, एसपी, मऊ
-
डिजिटल अरेस्ट करना शातिरों का नया हथियार, ऐसे बचें
इस तरह का फोन कॉल आने पर घबनाएं नहीं, बल्कि संयमित रहें।
जब बच्चों को हिरासत में लेने की कॉल आए तो पहले बच्चे या उसके साथियों को कॉल करके सुनिश्चित करें कि क्या मामला है?
ऑनलाइन रुपये न दें। वहीं डिजिटल हिरासत की स्थिति बने तो ठगों की कॉल डिस्कनेक्ट कर तत्काल पुलिस को सूचना दें।
मुकदमों में कार्रवाई और आरोपी को पकड़ने की बात कहकर रुपये मांगने की कॉल आए तो स्पष्ट मना कर दें।
रात में सोते वक्त मोबाइल पर इंटरनेट बंद करना भी ठगी से बचाता है।
वहीं फिजूल के एप डाउनलोड न करें। किसी को आधार कार्ड या पैनकार्ड न भेजें।
किसी नए लिंक पर क्लिक न करें, निजी जानकारी ठगों को मिल सकती है।
किसी को ओटीपी न बताएं, बैंक संबंधी डिटेल न दें।