रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार पर शेड न होने से तेज धूप में परेशान यात्री।
केंद्र सरकार भले ही रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधा बढ़ाने का दावा कर रही हो, लेकिन मऊ स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के नाम पर जो भी व्यवस्थाएं हैं सब हवा हवाई हैं। हालत यह है कि प्रतिदिन करीब दस हजार यात्रियों के आवागमन करने वाले मऊ जंक्शन पर महिलाओं की सुविधा के लिए कोई टिकट खिड़की तक नहीं है। बुधवार को अमर उजाला की टीम जब सुबह 8:00 बजे स्टेशन पहुंची तो सामने लगभग 125 मोटरसाइकिलें खड़ी दिखीं । 8:05 बजे बुकिंग काउंटर पर पहुंचे तो पांच में से तीन काउंटर बंद थे। यहां महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, विकलांगों के लिए अलग काउंटर की कोई व्यवस्था नहीं दिखी। विकलांगों के लिए निर्धारित काउंटर बंद रहा। 8:20 बजे पूछताछ काउंटर ट्रेनों की लोकेशन दर्शाने वाले बोर्ड पर कुछ लिखा ही नहीं था।
रेलवे स्टेशन जहां से प्रतिदिन 38 जोड़ी ट्रेन गुजरती हैं, वहां के स्टेेशन मास्टर के कमरे का ताला सुबह सवा नौ बजे तक नहीं खुला था। स्टेशन पर लगे सारे डस्टबिन कूड़े से भरे थे। बिना लाइसेंस के अवैध तरीके से वेंडर खाद्य पदार्थ बेच रहे थे। पूछे जाने पर वेंडर भोला ने बताया कि साहब की सेवा करने के एवज में वह यहां पर सामान बेच लेता हूं। प्लेटफार्म नंबर दो के सारे पंखे बंद थे। पूछने पर यांत्रिकी विभाग के कर्मचारी ने बताया कि पंखों को बनाया जा रहा है। 8:30 बजे टीम आगे बढ़ी तो प्लेटफार्म नंबर एक पर दाहिनी तरफ ओवरब्रिज के पास मिट्टी का ढेर दिखा। यहां कुछ निर्माण कार्य चल रहा है। 8:40 बजे प्लेटफार्म पर पहुंचने पर पेयजल के लिए कुल छह स्थानों पर नल लगे दिखे। इनमें गर्म पानी निकल रहा था। सहायक स्टेशन मास्टर के कक्ष के बगल में रोटरी क्लब द्वारा शीतल पेय से लोग पानी ले रहे थे। इसके सामने एक दूकान काफी दिनों से बंद पड़ी दिखाई दी। आगे बढ़े तो शीतल पेय के लिए लगा सिस्टम खराब दिखा। पकौड़ी समोसा बेंच रहे दूकानदार ने बताया कि यह काफी दिनों से खराब है। स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या एक पर सिर्फ एक पेशाबघर है। इसके अलावा प्लेटफार्म संख्या दो, तीन अथवा चार पर न तो शौचालय और न ही पेशाब घर।
भीषण गर्मी में यात्रियों को पीने के लिए शीतल पेयजल की दो टोटी लगी है। लेकिन दोनों में ठंडा पानी नहीं आता। प्लेट फार्म नंबर दो पर मौजूद उच्च श्रेणी महिला प्रतीक्षालय में तो सफाई नाम की चीज ही नहीं दिखी। इसमें पुरुष भी आते जाते दिखे। पूछने पर प्रतीक्षालय से निकलने वाले ने बताया कि वो कर्मचारी है। प्लेटफार्म नंबर चार की दशा अन्य तीन प्लेटफार्मों से और ज्यादा बदतर है। यहां पर यात्रियों को धूप और बारिश से बचाव के लिए शेड भी नहीं लगा है। 9:16 बजे जीआरपी थाने पर थानाध्यक्ष तो बैठे थे, लेकिन कोई फरियादी नहीं था। जीआरपी थाने के सामने कूड़ा फैला था। पीपल के पेड़ से गिरे गोंदा का ढेर के बीच यात्री आने जाने को विवश थे। सुबह 9:30 बजे प्लेटफार्म संख्या चार पर शाहगंज बलिया पैसेंजर ट्रेन आई। बलिया की ओर जाने वाले यात्री तीखी धूप में गाड़ी की प्रतीक्षा कर रहे थे। प्लेटफार्म पर शेड नहीं बना है।