मधुबन तहसील में शुक्रवार को जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन को लेकर हर विभाग कमियों को दूर करने में में जुटे हैं, वहीं बृहस्पतिवार को नेमडाड़ सीएचसी खुला ही नहीं।
बकरीद के अवकाश के बावजूद दोपहर 12 बजे तक अस्पताल खुला रहना था, लेकिन गेट बंद मिला। बीते पांच माह पहले इस पीएचसी को सीएचसी में तब्दील कर एक चिकित्सक के भरोसे संचालित किया जा रहा है।
जिस डॉक्टर को यहां प्रभारी और चिकित्सीय व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है, उसकी ड्यूटी सप्ताह में तीन दिन सात किलोमीटर दूर फतेहपुर मंडाव सीएचसी में इमरजेंसी ड्यूटी के लिए भी लगाई जाती है। ऐसे में जिले की यह पहली सीएचसी है, जहां डॉक्टर के अभाव में तीन दिन फार्मासिस्ट मरीजों का उपचार करते हैं।
बृहस्पतिवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर जब नेमडाड़ सीएचसी पहुंची तो अस्पताल का मुख्य गेट बंद मिला। ग्रामीणों के अनुसार यह अस्पताल सप्ताह में तीन दिन बंद रहता है और तीन दिन ही खुलता है। जबकि बकरीद अवकाश के बाद बृहस्पतिवार को ओपीडी संचालन दोपहर तक होना था।
इस संबंध में प्रभारी डॉ. विमलेंदु भूषण प्रसाद ने बताया कि वह इमरजेंसी ड्यूटी के चलते फतेहपुर मंडाव सीएचसी आ गए हैं। वहीं अन्य स्टाफ के बारे में पूछने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
अस्पताल में एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, एक डेंटल हाईजीनिस्ट और सीमित स्टाफ के भरोसे व्यवस्था चल रही है। डॉक्टर सप्ताह में तीन दिन ही यहां रहते हैं और बाकी तीन दिन फतेहपुर मंडाव सीएचसी में ड्यूटी करते हैं। ऐसे में मरीजों का इलाज फार्मासिस्ट के भरोसे होता है।
नियमानुसार किसी सीएचसी में एक महिला रोग विशेषज्ञ, एक सर्जन, एक एनेस्थेटिस्ट, एक बाल रोग विशेषज्ञव दो मेडिकल ऑफिसर तैनाती होने चाहिए।
मर्यादापुर, कमलसागर, अजोरपुर, मारूखपुर, डुबरी, रामपुर बेलौली सहित 40 से अधिक गांवों की करीब 20 हजार आबादी के लिए बना यह अतिरिक्त सीएचसी खुद बदहाली का शिकार है।
वर्जन-
ओपीडी समय से पहले बंद होने की जानकारी की जांच कराई जाएगी। डॉक्टरों की कमी के संबंध में शासन को पत्र भेजा गया है। एंबुलेंसकर्मियों द्वारा फोन न उठाने के मामले की भी जांच कराई जाएगी।
- डॉ. संजय गुप्ता, सीएमओ
सुबह 11 बजे बंद नेमडाड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र