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लापरवाही से बढ़ रहे केस

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मऊ। लॉकडाउन के दो चरण में जिले में कोरोना पॉजीटिव मरीज महज एक था। लेकिन अब यह संख्या 16 हो गई है। इसमें 15 तो बीते 11 दिनों में आए। चौकानें वाली बात है कि इनमें 15 प्रवासी श्रमिक है, जो कि मुंबई, दिल्ली, हरियाणा से लौटे हैं। देखा जाए तो बढ़ती संख्या के पीछे जिम्मेदारी की उदासीनता है। इसकी पुष्टि खुद रविवार को कोरोना पॉजीटिव ने की।रानीपुर के पलिया निवासी युवक ने बताया कि लॉकडाउन के चलते वह आर्थिक दिक्कत होने पर मधुबन तहसील के अहिरौली गांव में अपने फूफा के यहां जा रहा था। गांव से कुछ दूरी पर था तभी प्रशासन, केंद्र प्रभारी तथा प्रधान ने उसे कोरोना पाजीटिव बताते हुए लौटने के लिए फोन किया। इसके बाद वह मधुबन के सरफोरा गांव निवासी अपने के साथ बाइक से गांव पहुंचा। दोस्त उसे खुरहट-रानीपुर मार्ग स्थित क्वारंटीन सेंटर छोड़कर चला गया। जिसकी भनक प्रशासन तथा स्वास्थ विभाग को नहीं लगी। चौंकाने वाली बात है कि जिस युवक को होम क्वारंटीन होना था वह न केवल हरियाणा से लौटने के बाद पूरे गांव में घूमता रहा, बल्कि फूफा के बाद अपनी पत्नी के बुआ के यहां सूरजपुर में भी गया था। यहीं नहीं 13 मई को मुंबई से लौटे उसके पिता की मौत के बाद नियमानुसार उसे होम क्वारंटीन हो जाना चाहिए था। लेकिन वह न केवल गांव में घूमता रहता था बल्कि उसके घर के आस पास बने कुछ घरों के लोगों की आवाजाही भी लगातार बनी रही। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी बड़ी लापरवाही के पीछे युवक जिम्मेदार है या प्रवासियों के लौटने पर उनके होम क्वारंटीन होने की वास्वतिक स्थिति की मानीटरिंग करने वाले प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग की। जो भी हो। लेकिन इतना जरूर है कि युवक के पाजीटिव होेने पर ग्रामीण दहशत में हैं।
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