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डीआईओएस कार्यालय के कुछ कर्मियों पर शक की सुई

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मऊ। चौकीदार की तैनाती के बाद भी जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से 50 लैपटॉप चोरी होने के मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस के शक की सुई डीआईओएस विभाग के कुछ कर्मचारियों पर घूम गई है। कक्ष में ताला बंद रहने के बाद 10 लाख के लैपटॉप चोरी होने की घटना का कोई सुराग पुलिस को नहीं मिला है।
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वर्ष 2013-14 सपा शासन में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मेधावी छात्र छात्राओं को लैपटॉप बांटने की योजना शुरू की थी। एचपी कंपनी का प्रति लैपटॉप बैग सहित 19058 रुपये का था। लैपटॉप वितरण की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौंपी गई थी। उस दौरान कार्यक्रम आयोजित कर हजारों छात्र छात्राओं को जिला विद्यालय कार्यालय की सूची के अनुसार लैपटॉप वितरित किया गया था। वितरण के बाद 60 लैपटॉप बच गए थे। बचे 60 लैपटॉप को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के भवन में उपजिलाधिकारी की अभिरक्षा में सील्ड कर रखा गया था। 27 सितंबर 2019 को आईटीआई के प्रधानाचार्य के पत्र पर प्रधानाचार्य, जिला विद्यालय निरीक्षक तथा तहसीलदार की देखरेख में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के एक कमरे में ताला बंद कर रख दिया गया था। आश्चर्य की बात यह है कि कमरे का ताला बंद होने के बाद भी 10 लाख रुपये मूल्य के 50 लैपटॉप चोरी हो गए। इसके पहले कार्यालय में चोरी, चहारदीवारी तोड़े जाने सहित कई घटनाएं हो चुकी हैं। प्रथम दृष्टया पुलिस के शक की सुई विभाग के कुछ कर्मियों पर घूम रही है। पुलिस का मानना है कि विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से ही घटना का अंजाम दिया जा सकता है। चोरी की यह घटना दो मार्च को हुई। इसकी जानकारी होने पर डीआईओएस की ओर से पुलिस को सूचना दी गई। सोमवार की रात मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। कार्यालय अभी तक न तो लैपटॉप की बरामदगी हो पाई है और न ही चोरी का सुराग ही लगा सकी है। इस बाबत सरायलखंसी थानाध्यक्ष रामसिंह का कहना है कि लैपटॉप चोरी मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच पड़ताल चल रही है। शीघ्र ही घटना का पर्दाफाश कर दिया जाएगा।
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