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बिना चिकित्सक संचालित हो रहीं एनसीडी क्लीनिक

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मऊ। जिले में गैर संचारी बीमारियों का इलाज करने के लिए जिला अस्पताल सहित छह सरकारी अस्पतालों में अलग से एनसीडी (नान कम्यूनिकेबल डिसीज) क्लीनिक खोली गई हैं। लेकिन जिला अस्पताल को छोड़कर पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संचालित एनसीडी बिना चिकित्सक के संचालित हो रही है। वहीं दूसरे सरकारी अस्पतालों में डाक्टर न होने के चलते तैनात एलटी, काउंसलर और स्टॉफ नर्स इसे चला रहे हैं। रोजाना शुगर, हाईपरटेंशन, बीपी जैसे कई बीमारियों से पीड़ित मरीज क्लीनिक में इलाज के लिए पहुंचते है। लेकिन डॉक्टर न होने से उन्हें इलाज नहीं मिल पाता है। करीब 25 लाख की आबादी वाले जिले में गैर संचारी बीमारियों के उपचार के लिए अलग से एनसीडी क्लीनिक नवंबर 2016 में खोली गई थी। व्यवस्था को देखने के लिए उस समय फिजीशयन के रूप में डॉ. प्रशांत कुमार राय और महिला चिकित्सक के तौर पर डॉ. शालिनी राय की तैनाती की गई थी। इसके अलावा एपिडेमियोलॉजिस्ट के रूप में डॉ. आदित्य राय, लैब टैक्नीशियन धर्मेंद्र गिरी, फिजियोथेरेपिस्ट राधेश्याम और एक काउंसलर सहित दो स्टॉफ नर्सो की तैनाती थी। लेकिन कुछ माह बाद ही दोनों चिकित्सकों ने इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में बीते चार साल से एनसीडी क्लीनिक में आने वाले मरीजों की जांच एपिडेमियोलॉजिस्ट के रूप में डॉ. आदित्य राय के भरोसे हो रही थी, छह माह पूर्व एक चिकित्सक के तैनाती यहां होने से कुछ हद तक राहत मिली। सूत्रों की माने तो तैनात चिकित्सक भी हड्डी रोग विशेषज्ञ है न कि फिजीशियन। जबकि नियमानुसार एनसीडी क्लीनिक में मरीजों की जांच के लिए फिजीशियन की तैनाती होनी चाहिए। यहीं नहीं एनसीडी क्लीनिक में सीनियर चिकित्सक ना होने के चलते तैनात कर्मचारी अक्सर गायब हो जाते हैं। वहीं करीब तीन वर्ष पूर्व कोपागंज, घोसी, मुहम्मदाबाद गोहना, रतनपुरा, परदहां सीएचसी में एनसीडी शुरू की गई है, लेकिन चिकित्सक के न होने से मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। सीएमओ डॉ. एसएन दुबे ने बताया कि जिला अस्पताल में एक डाक्टर की तैनाती की जा चुकी है, दूसरे चिकित्सकों की प्रकिया भी लगभग पूरी हो चुकी है। आचार संहिता हटने के बाद चिकित्सकों की तैनाती कर दी जाएगी।
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