मऊ। बोझी बाजार तहसील क्षेत्र के माधोपुर गांव में प्रबोधिनी एकादशी के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय रात्रि कालीन श्रीराम चरित मानस कथा का बृहस्पतिवार की देर रात समापन हुआ। इसमें पधारे विभिन्न विद्वान मानस मनीषियों के सारगर्भित उद्बोधनों को सुनकर श्रोता भाव विभोर हो उठे। विद्वान व्यास पंडित गोकुलेश त्रिपाठी ने ज्ञान, भक्ति एवं वैराग्य तथ्यों की मार्मिक व्याख्या किया। जबकि ज्ञान और वैराग्य, भक्ति रूपी माता के दो पुत्र हैं। जिस मनुष्य के मन-मंदिर में इनका समुचित समन्वय स्थापित हो जाता है, उसका जीवन पूर्णरूपेण धन्य हो जाता है। पंडित अखिलेश मणि शांडिल्य ने उक्त तथ्यों की पुष्टि करते हुए श्रीराम के वन-प्रवास समय का वर्णन किया। इस क्रम में उन्होंने माता सेवरी के नवधा-भक्ति की मार्मिक विवेचना की। साथ ही मां सेवरी- श्रीराम मिलन की कथा सुनाई। कहा कि भक्ति में ही वह सर्वोत्तम शक्ति है, जिसकी बदौलत भगवान को अपने वश में किया जा सकता है। विद्वान व्यास पंडित सुधीरचंद त्रिपाठी ने सीता-राम विवाह की मनमोहक कथा सुनाकर श्रद्धालुओं का मन मोहा। अंत में कृपाशंकर द्विवेदी, मंगलदेव द्विवेदी ने संयुक्त स्वर में श्री रामायण जी की आरती की और प्रसाद का वितरण किया। कार्यक्रम की सफलता के लिए कार्यक्रम के संयोजक पंडित दयाशंकर द्विवेदी ने आदरणीय आचार्यजन एवं सम्मानित श्रद्धालु-श्रोताजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।