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जनपद के अधिकांश आंबेडकर स्कूलों की है हालत खस्ता:

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मऊ। जनपद के अधिकांश अनुदानित आंबेडकर स्कूलों की हालत काफी खस्ता है। अधिकांश आंबेडकर विद्यालयों के भवन जर्जर हाल में हैं। कई स्कूल खपरैल के कमरों में चल रहे हैं। कुछ टीन शेड वाले कमरों में संचालित हो रहे हैं। जहां दो एक कमरे हैं भी वे मानक विहीन हैं। इन विद्यालयों में फर्नीचर भी नहीं हैं। इन कमरों में जैसे तैसे पढ़ाई चल रही है। कार्यालय, किचेन, खेल के मैदान और डेस्क बेंच और बिजली ये सब संसाधन भी इन स्कूलों में उपलब्ध नहीं हैं। इस स्कूलों में छात्रों की संख्या काफी कम है। सुविधा विहीन इन विद्यालयों में अपने बच्चों को अभिभावक भेजने में रुचि नहीं लेते हैं। कई स्कूल तो भवन विहीन हैं लेकिन वहां कई अध्यापकों की तैनाती है। ऐसे स्कूलों को निधि से आर्थिक मदद देने से सांसद विधायक भी कतराते हैं। इन स्कूलों में कायाकल्प योजना का संचालन भी नहीं होता है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इन आंबेडकर स्कूलों के भवन निर्माण सहित अन्य कार्यों के लिए सरकार की ओर से कोई बजट नहीं मिलता है। प्रबंधकों की ओर से ही इन विद्यालयों में भवन सहित अन्य सुविधाओं के बहाल रखने की जिम्मेदारी है। पहले तो इन स्कूलों में मिड डे मील और निशुल्क ड्रेस का वितरण भी नहीं होता था लेकिन बाद में ये सुविधाएं दी जाने लगीं। अनुदान पर आ जाने के बाद प्रबंधक इन स्कूलों में अपनी तरफ से रुपये खर्च नहीं करना चाहते हैं। सांसद और विधायक तथा एमएलसी भी इन विद्यालयों के भवन निर्माण के लिए निधि से कोई मदद नहीं देते हैं।
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