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छह हजार से अधिक लोगों ने घर पर रहकर कोरोना को दी मात

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मऊ। जिले में संक्रमण काल में जिलेवासियों के लिए बीते वर्ष में शुरू की गई होम आईसोलेशन की सुविधा बहुत लाभप्रद साबित हो रही है। बीते वर्ष पहली लहर से लेकर दूसरी लहर में मिले आठ हजार से ज्यादा संक्रमित मरीजों में 6,600 मरीजों ने होम आईसोलेशन में रहकर संक्रमण को मात दी है। वर्तमान में 55 सक्रिय कोरोना मरीज है जिनका होम आईसोलेशन में इलाज हो रहा है। संकमण की दूसरी लहर में अगर होम आइसोलेशन की सुविधा नहीं होती तो अस्पतालों में बेड के लिए मरीजों के लिए परेशानी ओर बढ़ी होती। करीब 80 फीसदी मरीज आइसोलेेशन से ठीक हो रहे हैं।
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जिले में संक्रमण का पहला मामला बीते वर्ष 19 अप्रैल 2020 को कोपागंज में मिला था। इसके बाद प्रवासियों के महानगरों से लौटने में मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ। उधर मरीजों की संख्या बढ़ते देख शासन ने 20 जुलाई 2020 को होम आइसोलेशन की सुविधा शुरू कर दी। शासन के आदेश के बाद जनपद में भी बिना लक्षण वाले संक्रमित मरीज को होम आइसोलेशन की सुविधा देनी शुरू कर दी गई।
पहली लहर से लेकर दूसरी लहर में 5 मई तक जिले में अब तक 8 हजार 120 मरीज मिल चुके है। जिसमें 7,893 मरीज रिकवर हो चुके है। इसमें 6,655 मरीजों को होम आईसोलेशन में इलाज किया गया है। इसमें 6,600 मरीज ठीक हो चुके है। वर्तमान में जिले में सक्रिय 157 मरीजों में होम आईसोलेशन में 55 मरीजों का उपचार जारी है। शासन की होमआईसोलेशन की यह सुविधा संक्रमण की दूसरी लहर में बेहद कारगार साबित हुई।
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जिले में 31 मार्च 2021 तक कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 3,048 थी, जो कि संक्रमण की दूसरी लहर में महज 66 दिनों में 8,120 तक पहुंच गई। यानी दूसरी लहर में जिले में 4,172 मरीज मिले। ऐसे में होम आइसोलेशन की न होती सुविधा तो होती मरीजों की परेशानियों दोगुनी हो सकती थी। क्योंकिजिले में सरकारी कोविड अस्पताल एल-2, 100 बेड का एल-1 के अलावा दो डेडिकेडड सीएचसी और छह निजी कोविड अस्पतालों के 470 बेड की उपलब्धता है। अप्रैल में गंभीर संक्रमित लोगों को बेड न मिलने की समस्या से भी जूझना पड़ा। अगर, होम आइसोलेशन का विकल्प नहीं होता तो प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को संक्रमित मरीजों के लिए अस्पतालों का इंतजाम करना टेढ़ी खीर साबित होता।
होम आइसोलेशन के ये हैं नियम
मऊ। होम आइसोलेशन में घर में एक अलग हवादार कमरा हो। साथ ही एक अलग टॉयलेट भी हो, जिसे सिर्फ संक्रमित ही इस्तेमाल कर सकें। हल्के लक्षणों वाले मरीज को अपने कमरे की खिड़कियां खुली रखनी चाहिए। ताकि हवा और धूप कमरे में आ सके। मरीज को हर वक्त मास्क पहनकर रखना चाहिए, साथ ही मरीज के खाने का बर्तन, तौलिया, कपड़े और चादर वगैरह बिल्कुल अलग रखें। मरीज को दिन में 2-3 बार बुखार चेक करना चाहिए, ध्यान रहे कि बुखार 100 डिग्री फारेनहाइट से अधिक न हो, साथ ही ऑक्सीमीटर की मदद से ऑक्सीजन का लेवल भी चेक करते रहें। इसका लेवल 94 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए।
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