जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला वृक्षारोपण, पर्यावरण समिति आर्द्र भूमि समिति और जिला गंगा समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में हुई। कहा कि जनपद को वर्ष 2026-27 के लिए शासन स्तर से 30 लाख 51 हजार 481 पौधरोपण का लक्ष्य मिला है।
डीएम ने सभी विभागों को पौधारोपण के लिए जमीन को जल्द चिहिृत करने को कहा। कहा कि विभिन्न धार्मिक अवसरों पर नदियों में मूर्तियों के विसर्जन के कारण जल गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव देखा जा रहा है।
मूर्तियों के निर्माण में प्रयुक्त प्लास्टर ऑफ पेरिस, रासायनिक रंग, वार्निश एवं अन्य पदार्थ नदी के जल में घुलकर प्रदूषण बढ़ाते हैं, जो जलीय जीव-जंतुओं, मछलियों के लिए हानिकारक है। इसके अतिरिक्त, भारी धातुओं एवं रासायनिक अवशेषों के कारण जल मानव उपयोग के लिए भी असुरक्षित हो सकता है।
नदियों में मूर्ति विसर्जन से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए जिलाधिकारी ने आवश्यक प्रयास करने के निर्देश दिए। कहा कि लोग निर्धारित स्थलों, कृत्रिम कुंडों में ही विसर्जन करने की अपील की।
बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी विवेक कुमार श्रीवास्तव, जिला कृषि अधिकारी सोम प्रकाश गुप्ता, डीसी मनरेगा राजीव कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी कुमार अमरेंद्र सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
वन विभाग को 15 लाख, राजस्व विभाग को 76000 का मिला लक्ष्य
वन अधिकारी पीके पांडेय ने बताया कि पौधारोपण के लिए वन विभाग को 15 लाख, कृषि विभाग को 181000, उद्यान विभाग को 113000, ग्राम्य विकास विभाग को 808821, पंचायती राज विभाग 93000, राजस्व विभाग को 76000 सहित अन्य विभागों को भी लक्ष्य निर्धारित किया गया। कहा कि गड्ढों की खुदाई का कार्य संबंधित विभाग के अधिकारी सुनिश्चित कर लें। बताया कि जनपद में वर्ष 2020 से वर्ष 2023 तक किए गए पौधरोपण का सत्यापन शासन स्तर से गठित टीम करेगी।