घटना के बाद व्यापारी राजेंद्र कुमार अग्रवाल की तहरीर पर बीते दो अप्रैल की रात पुलिस ने अज्ञात चोरों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर जांच कर रही थी। थाना कोतवाली, एसओजी और सर्विलांस टीम ने शहर के अलग अलग स्थानों के 103 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसके बाद चोरों की पहचान हो पाई।
खुलासा करके एसपी कमलेश बहादुर ने बताया कि झारखंड प्रांत के साहिबगंज जिले के राधानगर थाना क्षेत्र के अजरुद्दीन टोला पीयरपुर निवासी आलम शेख, बोलटोला पीयरपुर निवासी अब्दुल हाय, पश्चिम बंगाल प्रांत के मुर्शिदाबाद जिले के फरक्का थाना के राम रामपुर निवासी शमीम अख्तर उर्फ राकेश, गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद थाना के कठउत निवासी गौरीशंकर राजभर संगठित गिरोह के रूप में कार्य करते हैं।
गिरोह का सरगना आलम शेख है। इन्होंने चोरी में निगरानी के लिए महिलाओं का भी सहारा लिया था। घटना के बाद सभी मऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन के पास मिले थे। सभी लोग बस से जमनिया होते हुए दिलदारनगर रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। जहां पर ब्रह्मपुत्र मेल से बरहरवा जाना था। लेकिन पुलिस चेकिंग के दौरान घबराहट में गौरीशंकर राजभर और अब्दुल हाय अपने अपने बैग छोड़कर भाग गए। एक बैग आलम शेख उठाकर ट्रेन में चढ़ गया।
दूसरा अभियुक्त शमीम अख्तर उर्फ राकेश मोबाइल से भरे अपने बैग के साथ ट्रेन में चढ़ गया था। अभियुक्तों ने बताया कि चोरी किए गए मोबाइलों का एक हिस्सा पश्चिम बंगाल में औने-पौने दाम पर बेच दिया गया, जिससे प्राप्त धनराशि लगभग 1.50 से दो लाख रुपये हुई। पूरा पैसा सभी ने आपस में बांट लिया था। शेष दो बैग मोबाइल को सरगना आलम शेख ने मालदा पश्चिम बंगाल निवासी एक दलाल शमीम के माध्यम से बांग्लादेश भेज दिया गया।