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मिक्सोपैथी से होगा मरीजों का नुकसान, डाक्टरों से लोगों का उठ जाएगा विश्वास

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मऊ। आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार आयुष विधा के डॉक्टरों को मेडिकल क्षेत्र में कुछ और छूट देने का फैसला किया है। इससे आयुष डॉक्टर एलोपैथ के समकक्ष प्रैक्टिस कर सकेंगे। सरकार की इस नीति का आईएमए ने विरोध करना शुरू कर दिया है। इस दौरान आईएमए के जिलाध्यक्ष डॉ. पीएल गुप्ता ने कहा कि मेडिकल कौसिल ऑफ इंडिया के नियम को दरकिनार कर केंद्र सरकार तो मिक्सोपैथी पद्धति की चिकित्सा प्रणाली लागू करना चाहती है, उसे हरगिज लागू नहीं होने दिया जाएगा। क्योंकि इससे चिकित्सा जगत की बदनामी होगी साथ ही साथ मरीजों का दोहन शुरू हो जाएगा।
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बात करने पर आईएमए के जिलाध्यक्ष डा. पीएल गुप्ता ने कहा कि अभी तक एलोपैथ और आयुष की चिकित्सा पद्धति अलग थी। लेकिन सरकार अब दोनों को मर्ज करना चाहती है, जिसे मिक्सोपैथी का नाम दिया गया है। यह नई पद्धति मरीजों के लिए घातक साबित होगी। वहीं आईएमए के जिला सचिव डॉ. सीएस साहनी ने बताया कि अभी तक आयुष चिकित्सा पद्धति में ऑपरेशन की व्यवस्था नहीं थी, लेकिन इस मिक्सोपैथी से अब आयुष पद्धति के डॉक्टर भी आपरेशन कर सकेंगे। जो मरीजों के लिए घातक साबित होगा। डॉॅॅॅ. ओपी सिंह ने बताया कि मिक्सोपैथी में आयुष डॉक्टरों को कुछ छोटे-मोटे ऑपरेशन की छूट दी गई है, लेकिन जब आयुष की डिग्री लेकर ये डॉक्टर एलोपैथ की दवा धड़ल्ले से लिखते है। मरीज को क्या पता कि आपरेशन करने वाले डाक्टर के पास कौन सी डिग्री है। इस मामले में डॉ. एसएन खत्री ने कहा कि सरकार का यह कदम आम जनता के लिए खतरनाक निर्णय है, क्योंकि इस व्यवस्था से उपचार सस्ता हो ना हो, लेकिन गंभीर बीमार मरीजों को महंगी मौत जरूर मिलेगी। बोले आयुष और एलोपैथ चिकित्सा पद्धति मेडिकल साइंस की दो धुरी हैं।
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