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प्रभारी मंत्री जी जरा देवारांचलवासियों की भी सुनिए

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मऊ में मधुबन तहसील के बिन्दटोलिया में घाघरा नदी द्वारा हो रही कटान। अमर उजाला - फोटो : MAU
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मऊ। जनपद की दो तहसीलों में पड़ने वाले घाघरा नदी के तटवर्ती लगभग 85 गांव हर साल नदी में आने वाली भीषण बाढ़ की विभीषिका झेलने को विवश होते हैं। इस साल भी नदी में लगभग दो महीनों से बाढ़ आई हुई है। देवारांचल के लगभग 60 गांव पानी से घिर ही गए हैं। इनके संपर्क मार्ग बाढ के पानी में डूब गए हैं। लोगों को बाढ़ के पानी से घुसकर कहीं भी आना जाना पड़ रहा है। गांवों में बाढ़ के पानी से सड़ गई फसलों की दुर्गंध और सडांध से गांव वासियों का जीना दुष्कर हो गया है। प्रशासन की लापरवाही से ना हादसे में चक्कीमूसाडोही छह लोगों की जान चली गई।
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बिंदटोलिया में हर साल कटान होने वाली कटान रोकने के लिए दो सालों से बिंदटोलिया गांव के लोग धरना अनशन प्रदर्शन कर रहे हैं। बंधे पर बना रेगुलेटर कई दशक पुराना हो गया है। इसकी मरम्मत नहीं हुई और किसी दिन ये भी नदी की बाढ़ का दबाव नहीं झेल सका तो भारी तबाही देखने को मिल सकती है। बदरहुआनाला बंध टूटने से दोहरीघाट ब्लाक के कई गांव पानी से घिर गए हैं। देवारांचल के लोगों की मांग है कि हर साल नदी में आने बाढ़ से उन्हें स्थाई मुक्ति दिलाई जाए। बाढ में किसानों की गन्ना से लेकर बाजरा और धान की बरबाद हो चुकी फसलों का उचित मुआवजा दिया जाए। देवारांचल के गरीबों को बाढ़ आने पर कम से कम आठ महीनों तक खाने पीने रहने कपड़े , दवा की व्यवस्था सरकार करे।
तिघरा के प्रधान कुंवर श्याम नारायण ने कहा कि यदि गजियापुर बंधा पर पत्थर समय से लगा दिया गया होता तो बंधा नहीं टूटा होता। इससे सैकड़ों एकड़ जमीन में लगी फसलें बर्बाद होने से बच जाती। इससे सैकड़ों परिवार वालों को पलायन का दंश नहीं झेलना पड़ता। वहीं बिंदटोलिया के रामलाल साहनी ने बताया कि बाढ़ से अहिरुपुर, तिघरा प्रधान मंत्री सड़क, कुंवरपुरवा, लौवासाथ, हड़ही, सुरैना, बैरियाडीह, भंवरुपुर, लक्ष्मीपुर भटोली , शिवराजपुर, भेड़कुल सुल्तानपुर आदि गांवों के संपर्क मार्ग डूबे हुए हैं। यदि बिंदटोलिया गाँव में ठोकर बन गया होता तो हजारों एकड़ जमीन कटान में कटकर नदी में विलीन नहीं हुई होती।
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बाढ़ की गंभीर स्थिति पर नेवाद गोपालपुर के प्रधान प्रतिनिधि अमित तिवारी ने कहा कि गजियापुर बंधा में स्थित पुलिया रेगुलेटर काफी पुराना हो गया है। यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं हुई तो ऐसा ही लीकेज हमेशा होता रहेगा और कभी भी टूट सकता है और इसके टूटने भारी तबाही उठानी पड़ जाएगी। जिसका अनुमान प्रशासन नहीं लगा पा रहा है।
वहीं अहिरुपुर के ग्राम प्रधान सत्येंद्र यादव ने कहा कि सरकार को देवारा में बसे राजस्व गांवों अथवा पुरवों को बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए सुरक्षा तटबंध बनाने चाहिए। जिससे देवारा के लोगों को जान माल से रक्षा हो सकी। साथ ही बाढग्रस्त गांवों के लोगों को समस रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उन्हें रहने खाने पीने और इलाज की व्यवस्था करनी चाहिए।
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