भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो के तत्वावधान में एसोसिएशन फॉर कंजर्वेशन ऑफ माइक्रोब्स एंड एप्लीकेशन के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय ‘सतत कृषि के लिए सूक्ष्मजीवी नवाचार’ विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला सह अनुसंधान–उद्योग संवाद का समापन शुक्रवार को हुआ।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 350 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें 32 उद्योग प्रतिनिधि, 14 किसान उत्पादक कंपनियां, 24 विशिष्ट वैज्ञानिक, शोधार्थी तथा स्टार्टअप उद्यमी शामिल रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. बी. सिंह, कुलपति, नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या ने किया। उन्होंने कहा कि सूक्ष्मजीव आधारित प्रौद्योगिकियां वर्तमान कृषि चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करती हैं और भविष्य की टिकाऊ कृषि का आधार बनेंगी।
उन्होंने जलवायु परिवर्तन, मृदा स्वास्थ्य में गिरावट और रासायनिक इनपुट पर बढ़ती निर्भरता जैसी समस्याओं का उल्लेख करते हुए सूक्ष्मजीवों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. आलोक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य अनुसंधान और उद्योग के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करना तथा विकसित तकनीकों को किसानों तक शीघ्र पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाना है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. ए. आनंदन ने सूक्ष्मजीवी उत्पादों के मानकीकरण, गुणवत्ता नियंत्रण और प्रमाणन की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि इन तकनीकों की विश्वसनीयता और स्वीकार्यता बढ़ाई जा सके।
उद्घाटन सत्र के दौरान विभिन्न किसान उत्पादक कंपनियों के बीच ज्ञान साझेदारी और प्रौद्योगिकी प्रसार के उद्देश्य से समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया। यह किसानों तक उन्नत तकनीकों के प्रभावी हस्तांतरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
कार्यक्रम के दौरान कुल छह तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें कृषि सूक्ष्मजीव विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इन सत्रों में सूक्ष्मजीव विविधता, माइक्रोबायोम अनुसंधान, जैव उर्वरक, जैव नियंत्रण एजेंट, बायो-स्टिमुलेंट्स, माइक्रोबियल कंसोर्टिया आधारित तकनीकें तथा जलवायु-स्मार्ट कृषि में सूक्ष्मजीवों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का समापन मुख्य अतिथि डॉ. संजय सिंह, महानिदेशक, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद ने किया। उन्होंने कहा कि सूक्ष्मजीवी नवाचारों के माध्यम से कृषि को अधिक टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल और लाभकारी बनाया जा सकता है।