सोमवार को भीषण गर्मी के दौरान नगर के रोडवेज के पास से जातीं युवतियां।
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अप्रैल में ही इस बार पारा तेजी से बढ़ने लगा है। सोमवार को पारा 42 तक जा पहुंचा। जिससे लोग बेहाल हाे उठे। माह में अभी 15 दिन ही बीता है। लेकिन तपिश ने असर दिख्ााना शुरू कर दिया है। तपिश इस कदर की बिना चेहरे को ढके बाहर निकलना धूप से अपने को झुलसाना है। 42 डिग्री सेल्सियस तापमान ने लोगों को परेश्ाान कर दिया। जरूरत पड़ने पर ही लाेग घ्ारों से निकले। सड़कें वीरान रहीं और दुकानों पर ग्राहकों की कमी। तपिश और गर्मी से बचने के लिए लोग सत्तू, बेल का शर्बत, आम का पन्ना, तरबूजा, ककड़ी, खीरा आदि का सेवन करते रहे।
वहीं बच्चे गर्मी से राहत पाने के लिए जिन पोखरों और नदियों में पानी है वहां जी भरके तैराकी के मजा के साथ गर्मी से राहत पाने का प्रयत्न कर रहे हैं। तापमान बढ़ने से ताल तलेयों का पानी सूखने लगा है। तालाबों और नदियों के किनारे पशु पक्षियों ने भी अपना डेरा डाल लिया है। भूगर्म जल स्तर प्रभावित होने के चलते हैंडपंपों से भी कम पानी निकल रहा है। ग्राहक न आने के चलते दुुकानदार भी शटर आधा गिराकर आराम कर रहे। लड़कियां जहां धूप से बचने के लिए स्कार्फका इस्तेमाल कर रही हैं।