जिले में खरीफ सीजन के लिए लक्ष्य से तीन गुना से भी ज्यादा डीएपी उर्वरक उपलब्ध है। प्रदेश सरकार ने डीएपी खाद के मूल्य में 35 रुपये प्रति बोरी की कमी कर दी है। साधन सहकारी समितियों पर सचिव नहीं मिल रहे हैं। इससे किसानों को पुरानी ऊंची कीमतों पर डीएपी खरीदनी पड़ रही है। अब साधन सहकारी समितियों पर औचक निरीक्षण की कार्रवाई जिलाधिकारी ने शुरु कराई है तो एक नई उम्मीद किसानों में जगी है कि अब से ही सही शायद सचिव गोदामों पर मौजूद मिले तो उन्हें डीएपी और यूरिया उचति दामों पर मिल सके।
अमर उजाला ने साधन सहकारी समितियों पर सचिवों के न मिलने की खबर 26 जुलाई के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिनमें इन तथ्यों को दर्शाया गया था कि जिले में खरीफ सीजन के लिए डीएपी का लक्ष्य केवल 2775 मीट्रिक टन तय है लेकिन इसके सापेक्ष दस पीसीएफ , दस डीसीएफ और 92 साधन सहाकरी समितियों की गोदामों पर इस समय 6776 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। चूंकि साधन सहकारी समितियों पर तैनात सचिव गोदामें पर मौजूद नहीं रहते इसलिए किसानों को जरूरत के समय डीएपी नहीं मिल पा रही है। चूंकि इस समय किसान धान की रोपाई कर रहे हैं इसलिए इस समय खेतों में डीएपी डालते हैं। उधर सरकार ने डीएपी की कीमतों में 35 रुपयों की कमी कर दी है।
इधर गोदामों पर सचिवों तथा प्रभारियों के न मिलने से किसानों को समय पर डीएपी नहीं मिल पा रही है। किसान नेता देव प्रकाश राय , देवेंद्र सिंह , राकेश सिंह , सुरेश यादव और देवेंद्र मिश्र ने जिलाधिकारी से अफसरों की एक टीम बनाकर सभी साधन सहकारी समितियों , पीसीएफ ,डीसीएफ केंद्रों पर औचक निरीक्षण कराने की मांग किया है। जिससे किसानों को सही समय और उचित दरों पर उर्वरक मिल सके।