मऊ। जिले के बाल वैज्ञानिकों की सोच को नया मंच देने और उनमें अनुसंधान की प्रवृत्ति विकसित करने के लिए राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसके माध्यम से 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के छात्र-छात्राएं अपने आसपास की स्थानीय समस्याओं की पहचान करेंगे और विज्ञान व तकनीक की मदद से उनके व्यावहारिक समाधान पर आधारित शोध पत्र तैयार करेंगे।
जिले में 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय, 97 सहायता प्राप्त, 17 राजकीय, 67 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय सहित 700 से अधिक मान्यता प्राप्त विद्यालय हैं। विद्यार्थियों में नवाचार और विज्ञान के प्रति लगाव पैदा करने के लिए विभाग की ओर से कवायद तेज कर दी गई है। छात्र-छात्राओं में वैज्ञानिक अभिरुचि बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस बाबत जिला समन्वयक, राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस, कुलदीप कुमार ने बताया कि इस वर्ष विद्यार्थियों से ‘सतत विकास के लिए विज्ञान’ मुख्य विषय पर नवाचार आधारित शोध पत्र आमंत्रित किए गए हैं। कार्यक्रम में सहभागिता के लिए जिले के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं का आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण कराने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें 10 से 17 वर्ष तक के छात्र अपने आसपास की स्थानीय समस्याओं की पहचान कर विज्ञान और तकनीक की मदद से उनके व्यावहारिक समाधान पर आधारित शोध पत्र तैयार करेंगे।
सरकारी और निजी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए 31 अगस्त तक ऑनलाइन पंजीकरण कराने की समय सीमा निर्धारित की गई है। अब तक 180 विद्यार्थियों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। इसके बाद होने वाले जिलास्तरीय कार्यक्रम के लिए विद्यार्थी अपना शोध पत्र जमा करेंगे।
जिलास्तरीय समिति शोध पत्रों की मौलिकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और समस्या निवारण की क्षमता के आधार पर उनका परीक्षण करेगी। जिलास्तरीय मूल्यांकन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली शीर्ष पांच प्रविष्टियों का चयन किया जाएगा। चयनित बाल वैज्ञानिकों को राज्यस्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में अपनी प्रस्तुतियां देने का अवसर मिलेगा। इनमें से एक प्रतिभागी को राष्ट्रीय स्तर के बाल वैज्ञानिक कांग्रेस के लिए भेजा जाएगा।