घोसी। मुकद्दस रमजान में रोजा अल्लाह के करीब ले जाने का बेहतरीन जरिया है। ऐसे में रोजेदार की इबादत उसे खुदा का महबूब बना देती है। यह बातें मदापुर सम्सपुर निवासी मौलवी शमशाद अहमद ने कहीं। बताया कि रमजान के महीने में रोजेदारों को चाहिए वह अपने सामर्थ्य के अनुसार गरीबों और असहायों की मदद करें। कहा कि रमजान में स्वयं की कमियों को सुधारने का इससे बेहतरीन मौका मुसलमानों को नहीं मिल सकता। क्योंकि रमजान महीने में एक अच्छाई का अज्र 70 गुना अधिक मिलता है। मौलाना ने बताया कि भूख प्यास की तड़प के बीच पंहुचने वाली खुदा की इबादत रोजेदार को खुदा का महबूब बना देती है। स्वयं को हर बुराई से बचाकर अल्लाह के करीब ले जाने का सबसे सुनहरा मौका रोजा है। रोजा गलत कामों को करने से रोकते हैं। इसलिए इस माह गलत कामों से बचना चाहिए। अधिक से अधिक भलाई का कार्य करना चाहिए। पड़ोसी का सहयोग करने के साथ ही कोरोना जैसी बीमारी से निजात दिलाने के लिए अल्लाह से दुआ भी करें। मौलाना ने रोजेदारों से विश्व में चल रही अशांति को खत्म करने के लिए भी दुआ करने की अपील की।